वैचारिकी

हमें पुरुषार्थ करना होगा

दीनदयाल उपाध्याय प्रत्येक व्यक्ति सुख की कामना लेकर कार्य करता है- भौतिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्...

सामाजिक रचना का आधार

दीनदयाल उपाध्याय पिछली बार जब हमने कुछ विचार किया था तो हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि कार्य का आधार...

मैं और हम

दीनदयाल उपाध्याय गतांक का शेष साध्य से ही साधन की महत्ता है और ‘हम’ का यही अंतर है। महाभारत का उदाहर...

मैं और हम

दीनदयाल उपाध्याय प्रत्येक देशभक्त व्यक्ति की ऐसी इच्छा होना स्वाभाविक ही है कि अपना देश वैभवशाली बने...

मनुष्य या मशीन

दीनदयाल उपाध्याय मनुष्य ने मशीन को अपनी सहायता और सुविधा के लिए बनाया, किंतु आज वह उसका गुलाम बन गया...