‘विचारधारा राष्ट्रहित में हो, इसके खिलाफ कतई नहीं’


     जेएनयू में स्वामी  विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 12 नवंबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जेएनयू में लगी स्वामीजी की प्रतिमा सभी को प्रेरित करे, ऊर्जा से भरे। यह प्रतिमा वह साहस दे, जिसे स्वामी विवेकानंद प्रत्येक व्यक्ति में देखना चाहते थे। यह प्रतिमा वो करुणा भाव सिखाए, जो स्वामी जी के दर्शन का मुख्य आधार है।

श्री मोदी ने कहा कि यह प्रतिमा हमें राष्ट्र के प्रति अगाध समर्पण सिखाए, प्रेम सिखाए जो स्वामी जी के जीवन का सर्वोच्च संदेश है। यह प्रतिमा देश को ‘विजन ऑफ वननेस’ के लिए प्रेरित करे, जो स्वामी जी के चिंतन की प्रेरणा रहा है। यह प्रतिमा देश को यूथ-लेड डेवलपमेंट के विजन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे, जो स्वामी जी की अपेक्षा रही है। यह प्रतिमा हमें स्वामी जी के सशक्त-समृद्ध भारत के सपने को साकार करने की प्रेरणा देती रहे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रतिमा नहीं है बल्कि ये उस विचार की ऊंचाई का प्रतीक है जिसके बल पर एक संन्यासी ने पूरी दुनिया को भारत का परिचय दिया। उनके पास वेदान्त का अगाध ज्ञान था। उनके पास एक विजन था। वह जानते थे कि भारत दुनिया को क्या दे सकता है। वह भारत के विश्व-बंधुत्व के संदेश को लेकर दुनिया में गए।

उन्होंने कहा कि किसी एक बात जिसने हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है- वह है राष्ट्रहित से ज्यादा प्राथमिकता अपनी विचारधारा को देना। क्योंकि मेरी विचारधारा ये कहती है, इसलिए देशहित के मामलों में भी मैं इसी सांचे में सोचूंगा, इसी दायरे में काम करूंगा, यह रास्ता सही नहीं है, ये गलत है।

श्री मोदी ने कहा कि आज हर कोई अपनी विचारधारा पर गर्व करता है। ये स्वाभाविक भी है, लेकिन फिर भी हमारी विचारधारा राष्ट्रहित के विषयों में राष्ट्र के साथ नजर आनी चाहिए, राष्ट्र के खिलाफ कतई नहीं। उन्होंने कहा कि आप देश के इतिहास में देखिए, जब-जब देश के सामने कोई कठिन समस्या आई है, हर विचार, हर विचारधारा के लोग राष्ट्रहित में एक साथ आए हैं। आज़ादी की लड़ाई में महात्मा गांधी के नेतृत्व में हर विचारधारा के लोग एक साथ आए थे। उन्होंने देश के लिए एक साथ संघर्ष किया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का युवा ही दुनियाभर में ब्रांड इंडिया का ब्रांड अम्बैसडर हैं। हमारे युवा भारत की संस्कृति और परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए आपसे अपेक्षा सिर्फ हज़ारों वर्षों से चली आ रही भारत की पुरातन पहचान पर गर्व करने भर की ही नहीं है, बल्कि 21वीं सदी में भारत की नई पहचान गढ़ने की भी है। श्री मोदी ने कहा कि अतीत में हमने दुनिया को क्या दिया ये याद रखना और ये बताना हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाता है। इसी आत्मविश्वास के बल पर हमें भविष्य पर काम करना है। भारत 21वीं सदी की दुनिया में क्या योगदान करेगा, इसके लिए नया (innovate) करना हम सभी का दायित्व है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब-जब भारत की सामर्थ्य बढ़ी है, तब-तब उससे दुनिया को लाभ हुआ है। भारत की आत्मनिर्भरता में ‘आत्मवत् सर्व-भूतेषु’ की भावना जुड़ी हुई है, पूरे संसार के कल्याण की सोच जुड़ी हुई है।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जेएनयू के वाइस चांसलर प्रोफेसर जगदीश कुमार, प्रो. वाइस चांसलर प्रोफेसर आर.पी.सिंह, जेएनयू के पूर्व छात्र डॉ. मनोज कुमार और मूर्तिकार श्री नरेश कुमावत को भी बधाई दी।