50,000 से ज्यादा आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेल्नेस सेंटरों का परिचालन शुरू


भारत ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में 20 नवंबर को एक और मील का पत्थर पार कर लिया। अब देशभर में 50,000 (50,025) से ज्यादा आयुष्मान भारत– हेल्थ एंड वेल्नेस सेंटरों (एबी-एचडब्ल्यूसी) में कामकाज शुरू हो गया है। लोगों को उनके घर के नजदीक समन्वित प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (सीपीएचसी) मुहैया कराने के लक्ष्य के साथ दिसंबर, 2022 तक 1.5 लाख एबी-एचडब्ल्यूसी स्थापित किए जाने हैं। 50,000 से ज्यादा सेंटर स्थापित हो जाने के बाद लक्ष्य का एक-तिहाई प्राप्त कर लिया गया है। इससे 25 करोड़ से ज्यादा लोगों की वहन योग्य प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवा तक पहुंच बन जाएगी।

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कोविड-19 महामारी की चुनौती के बावजूद एचडब्ल्यूसी में कामकाज शुरू करने में सफलता पाने के लिए राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह कार्य योजना बनाने, सभी स्तरों पर निगरानी रखने, प्रक्रिया के मानकीकरण, राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों को दिए गए कार्यों के लिए दर्शाए लचीलेपन और अब तक तैयार स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के प्रति केन्द्र और राज्य/केन्द्रशासित प्रदेशों के संयुक्त प्रयासों के फलस्वरूप संभव हो पाया है।

स्वास्थ्य मंत्री ने अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, चिकित्सा अधिकारियों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों और आशा कार्यकर्ताओं का खासतौर से धन्यवाद किया और कहा कि समन्वित प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवा प्रदान करने और लाखों लोगों को इस मुश्किल समय में अनिवार्य स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने की उनकी प्रतिबद्धता से ही यह संभव हो सका।

हेल्थ एंड वेल्नेस सेंटर लोगों को सीपीएचसी सेवाएं उपलब्ध कराते हैं और प्रजनन संबंधी, मातृत्व संबंधी, नव प्रसूता संबंधी, शिशु और किशोरों संबंधी तथा पोषण संबंधी (आरएमएनसीएचए+एन) सेवाएं मुहैया कराने के साथ-साथ संचारी रोगों पर नियंत्रण के लिए प्रयास करते हैं।

यह 50,025 एबी- एचडब्ल्यूसी देश के 678 जिलों में फैले हुए हैं और इनमें 27,890 उप-स्वास्थ्य केंद्र, 18,536 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 3,599 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र शामिल हैं। इन सभी एबी-एचडब्ल्यूसी में अब तक 28.10 करोड़ से ज्यादा लोग इलाज के लिए आ चुके हैं, जिनमें से 53 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं हैं। अब तक 6.43 करोड़ लोगों की उच्च रक्तचाप के लिए, 5.23 करोड़ की मधुमेह के लिए और 6.14 करोड़ की कैंसर के लिए स्क्रीनिंग की गई है। करीब 1.0 करोड़ लोगों को उच्च रक्तचाप के लिए और 60 लाख से ज्यादा तो मधुमेह के लिए नि:शुल्क दवाएं दी जा चुकी हैं।