‘बजट का मुख्य उद्देश्य बुनियादी ढांचे का तेजी से निर्माण और रोजगार सृजन है’


केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने सदी की सबसे बड़ी महामारी की पृष्ठभूमि में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर साल 2021-22 का केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया। ‘कमल संदेश’ के सह संपादक संजीव कुमार सिन्हा और राम प्रसाद त्रिपाठी के साथ बातचीत में श्रीमती निर्मला सीतारमण ने बजट की कुछ मुख्य बातों पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार कैसे सार्वजनिक व्यय के माध्यम से सड़क, बंदरगाह, कृषि, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा का निर्माण, शिक्षा और देश के समग्र विकास जैसे विषयों पर जोर देकर इनमें तेजी लाना चाहती है। प्रस्तुत है इस बातचीत के प्रमुख अंश :

•• आपने इस बजट को सदी की सबसे बड़ी महामारी ‘कोरोनो वायरस’ की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत किया है। महामारी के बाद हर कोई इस बारे में आशंकित था कि बजट 2021-22 क्या लेकर आयेगा। हालांकि, आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत इस सर्व-समावेशी बजट ने बहुत लोगों को आश्चर्यचकित किया है। इस बजट के साथ आप किन प्रमुख उद्देश्य को प्राप्त करना चाहती हैं?

इस बजट का प्रमुख उद्देश्य छह स्तंभों पर आधारित है। सबसे पहले, ‘स्वास्थ्य एवं खुशहाली’, हमने स्वास्थ्य के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें तीन क्षेत्रों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा- निवारक, उपचारात्मक और सेहत। इसमें स्वच्छता और प्रदूषण पर नियंत्रण जैसे कारक भी शामिल हैं। दूसरा है, ‘भौतिक एवं वित्तीय पूंजी, और अवसंरचना’। इसके तहत हम संस्थागत संरचनाओं का निर्माण, परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण, और मजबूत बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण को सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय और राज्य के बजट में पूंजीगत व्यय की हिस्सेदारी बढ़ाएंगे। बुनियादी ढांचे पर व्यय के गुणक प्रभाव व्यापक विकास सुनिश्चित करेगा।

तीसरा ‘आकांक्षी भारत के लिए समावेशी विकास’ में किसानों की आय को बढ़ाना, मत्स्य पालन को विकसित करना और सभी के लिए वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाना शामिल हैं। इसमें प्रवासी श्रमिकों और मजदूरों के लिए एक समर्पित पोर्टल जैसे कदम भी शामिल हैं जो निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों के स्वास्थ्य, आवास, कौशल, बीमा, क्रेडिट, मजदूरों के लिए योजनाएं और भोजन आदि की प्रासंगिक जानकारी देगा। चौथा स्तंभ, ‘मानव पूंजी को फिर से ऊर्जावान बनाना’ है। यहां हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि समाज के सभी वर्गों को ‘न्यू इंडिया’ के विकास की कहानी- अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, युवाओं आदि में योगदान करने का समान अवसर मिले। यह सभी को समान शिक्षा के अवसर और कौशल विकास की सुविधाएं प्रदान करने पर केंद्रित है।

‘नवाचार और अनुसंधान व विकास’ पांचवा स्तंभ है। अन्य बातों के अलावा, इसमें राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की शुरुआत शामिल है, जिसमें देश के समग्र अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए 50000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ राष्ट्रीय-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। छठा और अंतिम स्तंभ है ‘न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन’, जो हमेशा माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का आदर्श वाक्य रहा है, जो नागरिकों को बिना किसी हस्तक्षेप के आसानी से जीवन-यापन करने के लिए विभिन्न उपाय करता है। फिर चाहे इसके लिए सरकार को न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए अधिक प्राधिकरणों को स्थापित करने की बात हो या सीपीएसई के साथ काम करने वाली कंपनियों के लिए व्यापार करने में आसानी का मुद्दा हो।

• स्वास्थ्य बजट को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाना, यह एक बहुत ही साहसिक कदम था। वहीं कोविड टीके के लिए 35,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया गया है। क्या आपको लगता है कि यह भारी भरकम आवंटन स्वास्थ्य क्षेत्र और इसके बुनियादी ढांचे को बदल देगा?

हां, क्योंकि हमने स्वास्थ्य के प्रति जो दृष्टिकोण अपनाया है, वह समग्र है। जैसाकि पहले बताया गया है कि हम तीन क्षेत्रों को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं: निवारक, उपचारात्मक और सेहत। इसमें 112 आकांक्षी जिलों में पोषण कार्यक्रमों में सुधार के लिए गहन रणनीति अपनाने के साथ पोषण मापदंडों पर भी जोर दिया गया है। डब्ल्यूएचओ की सिफारिश को ध्यान में रखते हुए यह बजट स्वच्छ जल, स्वच्छ पर्यावरण को सुनिश्चित करने पर महत्व देता है, जो सार्वभौमिक स्वास्थ्य को प्राप्त करने के लिए एक शर्त के रूप में है। इस उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए हम जल जीवन मिशन (शहरी) शुरू कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य सभी 4378 शहरी स्थानीय निकायों में जल-आपूर्ति के साथ-साथ 500 अमृत शहरों में तरल अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर कार्य करेगा। शहरी स्वच्छ भारत मिशन 2.0 को 5 वर्षों की अवधि में 1,41,678 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय आवंटन के साथ लागू किया जाएगा। इसके अलावा, एक लाख से अधिक आबादी वाले 42 शहरी केंद्रों के लिए वायु-प्रदूषण से निपटने के लिए 2,217 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई है।

• मेगा टेक्सटाइल पार्कों और अवसंरचना के लिए विशाल बजट आवंटन की घोषणा के पीछे क्या विचार है? यह कुछ राज्यों से भारी श्रम पलायन समस्या के लिए बहुप्रतीक्षित समाधान का कैसे माध्यम बनता है और किस प्रकार रोजगार के अवसर पैदा करेगा?

पीएलआई योजना के साथ हम उन प्रमुख उद्योगों को मजबूत कर रहे हैं, जहां हमें बड़ी संभावनाएं दिख रही हैं। कपड़ा उद्योग भी ऐसा ही एक क्षेत्र है। हम उद्योग को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना चाहते हैं और प्रस्तावित मेगा इनवेस्टमेंट टेक्सटाइल्स पार्कों के माध्यम से निवेश आकर्षित करना चाहते हैं। इसके पीछे रोजगार सृजन एक प्रमुख लक्ष्य है। अवसंरचना पर खर्च करके हम संपत्ति निर्माण में निवेश करना चाहते हैं जैसे कि सड़क, बंदरगाह आदि। इसका कई गुना प्रभाव पड़ने वाला है। यह मुख्य उद्योगों जैसे सीमेंट, स्टील, बिजली, आदि में मांग बढ़ाएगा। यह बदले में रोजगार पैदा करेगा। जबकि एक अवसंरचना परियोजना को पूरा होने में कुछ साल लगते हैं, लेकिन इससे नौकरियां तुरंत उत्पन्न होती हैं। चूंकि चल रही और घोषित परियोजनाएं विभिन्न राज्यों में फैली हुई हैं, तो यह कदम सभी राज्यों के श्रमिकों को लाभान्वित करने जा रहा है।

• इस साल के बजट में कृषि क्षेत्र और कृषि अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए कई प्रावधान हैं। क्या कृषि सुधारों का विरोध इसमें बाधक बन सकता है?

केन्द्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में सुधार को लागू करने में विपक्षी दलों को साथ लिया है। वास्तव में सरकार जिन सुधारों को लागू कर रही है, उनको लेकर कांग्रेस पार्टी ने खुद कहा था कि अगर वह चुनाव जीत जाती तो ऐसा ही करती! कांग्रेस ने अपने 2019 के घोषणा-पत्र में कहा कि वह एपीएमसी अधिनियम को निरस्त करेगी और कृषि उपज में व्यापार (निर्यात और अंतर-राज्य व्यापार) को सभी प्रतिबंधों से मुक्त करेगी।

2014 से ही हमने किसान को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कृषि क्षेत्र में बदलाव शुरू किया है। फसल बीमा योजना को अधिक किसान-हितैषी बनाने पर बल दिया गया। पीएम-किसान योजना को लागू किया गया। सरकार ने बार-बार तीनों कृषि कानूनों पर संवाद आमंत्रित किए हैं। अब तक, 12 दौर की वार्ता पूरी हो चुकी है और सरकार आगे भी खुले मन से बात करने को तैयार है। कृषि मंत्री ने कहा है कि सरकार इन कानूनों को लेकर विस्तृत चर्चा करने के लिए तैयार है। हमारी सरकार इस स्तर तक खुले मन से बात करने को तैयार है।

इस वर्ष की शुरुआत में माननीय प्रधानमंत्री ने स्वामित्व योजना शुरू की थी। इसके तहत गांवों में संपत्ति का मालिकाना हक दिया जा रहा है। अब तक 1,241 गांवों में लगभग 1.80 लाख संपत्ति-मालिकों को कार्ड प्रदान किए गए हैं। केंद्रीय बजट में वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान सभी राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को इसके तहत आने का प्रयास किया जा रहा है।

किसानों को पर्याप्त ऋण उपलब्ध कराने के लिए कृषि ऋण लक्ष्य को वित्त वर्ष 2021-22 में बढ़ाकर 16.5 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। ग्रामीण अवसंरचना विकास फंड का आवंटन भी 30,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया। माइक्रो इरिगेशन फंड को दोगुना किया गया।

‘आपरेशन ग्रीन स्कीम’ का दायरा बढ़ाया गया है, जो टमाटर, प्याज और आलू पर लागू था, उसमें 22 खराब होने वाले उत्पादों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, बजट में 1,000 नयी मंडियों को ई-नाम के साथ एकीकृत किये जाने का प्रावधान है।

एपीएमसी मंडियों को कृषि अवसंरचना निधि से पैसा उपलब्ध करवाया जा सकेगा, जिसका प्रयोग मंडियों की अवसंरचना सुविधाओं को बढ़ाने के लिए किया जा सकेगा। मछली पकड़ने के बंदरगाह और मछली लैंडिंग केंद्रों के विकास में पर्याप्त निवेश की घोषणा की गई हैं। सरकार नदियों और जलमार्गों के किनारे अंतर्देशीय मछली पकड़ने के बंदरगाह और मछली पकड़ने के केंद्र विकसित करेगी।

• जैसाकि हम सब जानते हैं कि कोरोना महामारी ने भारत में व्यावसायिक वर्ग को अत्यधिक प्रभावित किया है। महामारी के बाद की परिस्थितियों में प्रस्तुत इस बजट के बाद इन वर्गों ने राहत की सांस ली है। व्यावसायिक वर्ग के लिए आपका क्या संदेश है?

जैसा कि मैंने पिछले बजट में कहा था और सरकार ने पिछले वर्ष में दिखाया है और इस बजट में भी, सरकार देश के व्यापारिक वर्ग के समर्थन में है। कोविड के दौरान सरकार ने एमएसएमई के लिए आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना के रूप में आपातकालीन ऋण की पेशकश की, जिसके माध्यम से 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के आपातकालीन ऋण को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा, सरकार ने तनावग्रस्त एमएसएमई के लिए अधीनस्थ ऋण के तौर पर 20,000 करोड़ रुपये प्रदान किए। ‘आत्मनिर्भर पैकेज’ के बाद शुरू होने वाले स्टार्टअप एमएसएमई की परिभाषा बदल रहे हैं। घोषित किए गए प्रमुख परिवर्तनों में से एक यह था कि भारत-पंजीकृत कंपनियां अब अधिसूचित वैश्विक एक्सचेंजों में प्रारंभिक आईपीओ की पेशकश कर सकती हैं। इस प्रकार भारतीय स्टार्टअप अब वैश्विक स्तर पर मौजूद सार्वजनिक और निजी बाजारों की पूंजी का उपयोग कर सकते हैं।

रक्षा आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए सरकार का समग्र जोर नए निवेशकों सहित भारतीय कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा करने पर है। 74 प्रतिशत एफडीआई सीमा भी नए उपक्रमों के लिए वैश्विक निवेशकों से पूंजी जुटाना आसान बनाती है। सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा तैयारियों के पीछे तकनीकी नवाचार पर जोर दे रही है, जिससे नई कंपनियों के लिए इस नए क्षेत्र में खुद को स्थापित करने के अवसर पैदा हो रहे हैं। ऐसे समय में जब भारत पहले से ही अंतरिक्ष क्षेत्र में एक जाना पहचाना नाम है, निजी भागीदारी की अनुमति देने के सरकार के फैसले से इस क्षेत्र के लिए अत्याधुनिक नवाचार के नए रास्ते खुल गए हैं और नई कंपनियां इस क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं।

• इस ऐतिहासिक बजट के बाद, आप आर्थिक सुधार के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहु-प्रतीक्षित विकास को कैसे देखती हैं? भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री का ‘आत्मनिर्भर भारत’ का संकल्प कितना कारगर है?

भारतीय शेयर बाजार ने केंद्रीय बजट 2021 की प्रशंसा की है, जिसका प्रमाण बीएसई सेंसेक्स में आई तेजी है।परिणामस्वरूप इंट्रा-डे ट्रेड में 2,000 से अधिक अंक की बढ़त और एनएसई निफ्टी 14,000 के स्तर तक पहुंच गया। अर्थव्यवस्था के अधिकांश संकेतक न केवल सकारात्मक हो गए हैं, बल्कि वे कोरोना पूर्व की स्थिति से बेहतर हो गए। जनवरी, 2021 में जीएसटी संग्रह 1.19 लाख करोड़ रुपये था, जो अब तक का सबसे अधिक कर संग्रह है। यह दिसंबर 2020 में एकत्र किए गए 1.15 लाख करोड़ रुपये के बाद का आंकड़ा है, जो अपने आप में पहले ही उच्चतम संग्रह का रिकार्ड बना चुका था। भारत का विनिर्माण क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) मजबूती के साथ जनवरी में 57.7 था, जो तीन महीने का इसका सबसे उच्च्तम स्तर था। दिसंबर, 2020 और नवंबर, 2020 में विनिर्माण पीएमआई क्रमशः 56.4 और 56.3 था।

दिसंबर, 2020 में पेट्रोलियम की खपत 1.85 करोड़ मीट्रिक टन रही, जो पिछले साल के आसपास ही है। दिसंबर, 2019 की तुलना में दिसंबर, 2020 में रेलवे माल ढुलाई में 8.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यूपीआई लेनदेन भी उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो जनवरी, 2021 में मूल्य के हिसाब से 4.31 लाख करोड़ रुपये और संख्या के हिसाब से 230 करोड़ रुपये है। यह जनवरी, 2020 की तुलना में मूल्य और संख्या के हिसाब से लगभग दोगुना है। आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2021-22 में 11 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। रिजर्व बैंक का सर्वेक्षण विनिर्माण क्षेत्र में क्षमता उपयोग में सुधार की ओर इशारा करता है जो कि पूर्ववर्ती तिमाही में 47.3 प्रतिशत से दूसरी तिमाही: 2020-21 में 63.3 प्रतिशत रहा। भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश हाल के महीनों में बढ़ा है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रभावशाली तेजी को दिखाता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विश्वास के संकेत के रूप में, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा है कि कैलेंडर वर्ष 2021 में भारत के लिए 11.5 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान है, भारत एकमात्र ऐसा देश है जो दोहरे अंकों की वृद्धि के अनुमान के साथ आगे बढ़ रहा है।