जबरन धर्म परिवर्तन पर उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने पारित किया अध्यादेश


त्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की कैबिनेट ने 24 नवंबर, 2020 को ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश-2020’ पारित कर दिया। 28 नवंबर को राज्यपाल की स्वीकृति के बाद यह अध्यादेश अमल में आ गया। इस कानून के मुताबिक मिथ्या, झूठ, जबरन, प्रभाव दिखाकर, धमकाकर, लालच देकर, विवाह के नाम पर या धोखे से किया या कराया गया धर्म परिवर्तन अपराध की श्रेणी में आएगा और धोखे से धर्म बदलवाने पर 10 साल तक की सजा होगी। इसके अलावा धर्म परिवर्तन के लिए जिलाधिकारी को दो महीने पहले सूचना देनी होगी।

इस कानून में धर्म परिवर्तन के लिए 15,000 रुपये के जुर्माने के साथ 1-5 साल की जेल की सजा का प्रावधान है। अगर एससी-एसटी समुदाय की नाबालिगों और महिलाओं के साथ ऐसा होता है, तो 25,000 रुपये के जुर्माने के साथ 3-10 साल की जेल होगी।

इसी प्रकार से सामूहिक धर्म परिवर्तन करने या कराने के मामले में भी यह कानून लागू होगा। जिसके तहत ऐसा करने या कराने वाले सामाजिक संगठनों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा। सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामलों में 3 साल से कम की सजा नहीं होगी, लेकिन इस सजा को अधिकतम 10 वर्ष की कैद तक बढ़ायी जा सकेगी और ऐसे मामलों में जुर्माने की रकम 50 हजार रुपये से कम नहीं होगी।