डिजिटल इंडिया लोगों के जीवन में आमूल-चूल परिवर्तन ला रहा है

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राजीव कुमार

डिजिटल इंडिया भारत सरकार द्वारा आरंभ की गई एक ऐसी अनूठी पहल है जिसका उद्देश्य सभी छोटे और बड़े सरकारी विभागों को डिजिटल रूप देकर उनकी गति को तीव्र से तीव्रतम कर देना है। इससे लाभ यह होगा कि बिना कागज के प्रयोग के सभी सरकारी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक रूप से जनता तक निर्वाध रूप से पहुंच सकेंगी व अविलंब कार्य को पूरा किया जा सकेगा। भारत के हर नागरिक को डिजिटल दुनिया से जोड़ने के लिए सरकार ने यह बेहद महत्वपूर्ण और सही कदम उठाया है जो आने वाले भविष्य में मील का पत्थर सिद्ध होगा। इससे देश की अर्थव्यवस्था में अत्यंत सुधार तो होगा ही साथ में देश में नई टेक्नोलॉजी का भी विकास होगा।

डिजिटल इंडिया योजना का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य यह कि ग्रामीण इलाकों को हाई स्पीड इंटरनेट के माध्यम से जोड़ना भी है। देखा जाए तो डिजिटल इंडिया के तीन कोर घटक हैं : पहला, डिजिटल आधारभूत ढांचे का निर्माण करना दूसरा, इलेक्ट्रॉनिक रूप से सेवाओं को जनता तक पहुंचाना और तीसरा, डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना।

एक कार्यक्रम के तहत दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में श्री नरेन्द्र मोदी ने 1 जुलाई 2015 को डिजिटल इंडिया अभियान आरंभ किया था जिसका आज पूरे भारत में विस्तार देखा जा सकता है।
देश को डिजिटल रूप से विकसित करने और देश के आईटी संस्थान में सुधार करने के लिए डिजिटल इंडिया महत्वपूर्ण पहल है। डिजिटल इंडिया अभियान की विभिन्न योजनाओं जैसे डिजिटल लॉकर, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल, ई-स्वास्थ्य, ई-शिक्षा, ई-साइन आदि को शुरु करके इस कार्यक्रम का अनावरण किया गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि डिजिटल ताकत को समझना समय की मांग है और अगर यह नहीं किया गया तो दुनिया बहुत आगे निकल जाएगी और हम पीछे रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश ‘एम-गवर्नेंस’ में बदलने वाला है मतलब ‘मोबाइल-गवर्नेंस’ से है।
डिजिटल इंडिया भारत का सद्-संकल्प है, आत्मनिर्भर भारत की साधना है। सरकार और जनता के बीच, सिस्टम और सुविधाओं के बीच सारी दूरियों को समाप्त करना समय की मांग है। डिजिटल इंडिया ने ये कैसे संभव किया है इसका शानदार उदाहरण डिजीलॉकर (Digi Locker) है, भारत सरकार के स्रोत के मुताबिक 30 नवंबर, 2021 तक 8.80 करोड़ लोग डिजीलॉकर के सक्रिय प्रयोगकर्ता हैं वहीं 1.78 लाख लाख ग्राम पंचायतें आप्टिकल फाइबर से जुड़ गईं हैं और 59000 से अधिक स्टार्ट्सअप कार्यरत हैं, जो हमारे स्वप्न को एक नया आयाम दे रहे हैं।

बिजली बिल, पानी बिल, इनकम टैक्स भरना एकदम आसान और तेज डिजिटल इंडिया से ही संभव हुआ है। गरीबों को मिलने वाले राशन की डिलीवरी को आसान किया है, एक ही राशन कार्ड पूरे देश में मान्य है। ऑनलाइन पढ़ाई से लेकर दवाई तक में डिजिटल इंडिया में अहम भूमिका रही है। सही मायने में देखा जाए तो डिजिटल इंडिया से न्यू इंडिया का सपना मोदी जी ने जो देखा था वो अब साकार हो रहा है। डिजिटल लेन-देन में 2016 से 2021 तक अभूतपूर्व वृद्धि हुई है : UPI (यूपीआई) पर लेन-देन का मूल्य (रूपये बिलियन) में देखा जाए तो 2016 में कुल 69 बिलियन था जो 2020-21 में बढ़कर 41,306 बिलियन हो गया। वहीं POS (पीओएस) पर RUPAY कार्ड के उपयोग का मूल्य (रूपये बिलियन) में 2016-17 में 289 बिलियन से बढ़कर 2020-21 में 1,169 बिलियन हो गया।

कोविड काल में हमें डिजिटल इंडिया ने हमारे सारे कार्यों को एकदम से सरल और सुलभ बना दिया था। डिजिटल इंडिया मतलब एकदम पारदर्शी व्यवस्था। डिजिटल यानी तेजी से लाभ देने वाली एक ऐसी प्रणाली जो मानव जीवन को एकदम सुगम्य बना देती है। ये दशक डिजिटल टेक्नोलॉजी को पूरी तरह से बढ़ाने वाला है। इतना ही नहीं, भारत की दर्जनों डिजिटल कंपनियां यूनिकॉर्न क्लब में शामिल होंगी।
इस तरह डिजिटलीकरण से आगे चलकर डिजिटल लेन-देन में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा सकेगी। 24 नवंबर, 2021 तक के भारत सरकार के स्रोतों को देखा जाए तो गवर्नमेंट ई-मार्केट प्लेस (GeM) पोर्टल से सार्वजनिक खरीद में एक अद्भुत क्रांति आ रही है: पोर्टल के माध्यम कुल लेन-देन 1.58 लाख करोड़ रुपये से अधिक, विक्रेता और सेवा प्रदाता पंजीकृत 31.71 लाख से भी अधिक और उत्पाद उपलब्धता 63.46 लाख से अधिक हो चुका है।

वहीं, प्रधानमंत्री मोदी जी ने बिम्सटेक देशों के बीच कह चुके हैं कि यह सदी डिजिटल क्रांति और नए युग के नवाचारों की सदी है। यह एशिया की सदी भी है इसलिए यह हमारे समय की मांग है कि भविष्य की प्रौद्योगिकी और उद्यमी इसी क्षेत्र से उभरें। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘द सिडनी डायलॉग’ में भारत के प्रौद्योगिकी विकास और क्रांति के विषय पर कहा कि भारत की डिजिटल क्रांति की जड़ें लोकतंत्र में निहित हैं। श्री मोदी ने कहा कि देश में डिजिटल तकनीक से लोगों की जिंदगी बदल रही हैं। डिजिटल युग हमारे चारों ओर सब कुछ बदल रहा है। इसने राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज को फिर से परिभाषित किया है। यह संप्रभुता, शासन, नैतिकता, क़ानून, अधिकारों और सुरक्षा पर नए सवाल उठा रहा है। यह अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा, शक्ति और नेतृत्व को नया आकार दे रहा है।

श्री मोदी ने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख साधन बन गई है, ये भविष्य की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को आकार देने की कुंजी है। प्रौद्योगिकी और डेटा नए हथियार बन रहे हैं।’’