गति शक्ति विभागों के आपसी दूरी को कम करके उनके बीच समन्वय स्थापित करेगी

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गतिशक्ति क्या है?

देश में बुनियादी ढांचे की तेजी से विकास के लिए गति शक्ति योजना की शुरुआत की गयी है। खासकर आधारभूत ढांचे से सम्बंधित विभागों में समन्वय नहीं होने के वजह से पूरे देश को सड़क, रेल, समुद्री मार्ग और हवाई मार्ग से जोड़ने अर्थात् ‘मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी’ के कार्य में अनावश्यक देरी हो रही थी। अत: देश के बहुयामी विकास में तेजी लाने के लिए 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गति-शक्ति योजना का प्रारंभ किया गया। आधारभूत संरचना के तेजी से क्रियान्वयन के लिए गति शक्ति डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेगी। यह मंच एकीकृत योजना और बुनियादी ढांचा कनेक्टिविटी परियोजनाओं के समन्वित कार्यान्वयन के लिए रेलवे और रोडवेज सहित 16 मंत्रालयों को एक साथ समन्वयित करेगा। यह भारतमाला, सागरमाला, अंतर्देशीय जलमार्ग, शुष्क/भूमि बंदरगाहों, उड़ान आदि सम्बंधित विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों की बुनियादी ढांचा योजनाओं में इसके द्वारा समन्वय स्थापित किया जाएगा।

गति शक्ति क्यों?

बुनियादी ढांचा विकास की कुंजी है। इस लिए इन योजनाओं का तेजी से कार्यान्यवन सुनिश्चित हो। प्रधानमंत्री इस बात पर जोर देते हैं कि यह अनिवार्य है कि भारत में शासन अधिक कुशल और उत्तरदायी हो। उनके द्वारा ‘प्रगति’(PRAGATI) मंच का शुभारंभ इसी दिशा में एक कदम था। भारत के प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने महत्वाकांक्षी बहुउद्देश्यीय और बहु-मॉडल प्लेटफॉर्म प्रगति (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) की शुरुआत की। इस प्लेटफार्म द्वारा प्रधानमंत्री भारत सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और परियोजनाओं के साथ-साथ राज्य सरकारों द्वारा चिह्नित परियोजनाओं की निगरानी और समीक्षा करते हैं। यह एक त्रिस्तरीय प्रणाली है जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्र सरकार के सचिव और राज्यों के मुख्य सचिव आते हैं। यह भी परियोजनाओं के निष्पादन में तेजी लाता है। लेकिन यह पाया गया कि आधारभूत संरचना से सम्बंधित विभिन्न विभागों में समन्वय की कमी है और विकास प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी हो रही है।

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के अनुसार, यातायात के हिस्से पर सड़कें हावी हैं। भारत में 64% माल ढुलाई सड़कों के माध्यम से की जाती है। चूंकि डीजल, सड़क परिवहन को संचालित करता है, तेल की कीमतों में कोई भी वृद्धि, उच्च परिवहन लागत का कारण बनती हैं और कीमतें बढ़ाती है । यहां तक कि जीएसटी, फास्टटैग और अन्य पहलों के बाद भी परिवहन हिस्सेदारी में रेलवे के एक उच्च हिस्से की आशा करना वांछनीय है क्योंकि यह एक अधिक कुशल तरीका और तुलनात्मक सस्ता है। इसके अलावा कई आर्थिक क्षेत्रों, औद्योगिक पार्कों, लॉजिस्टिक केंद्रों और बंदरगाहों की योजना ‘बहु-मॉडल कनेक्टिविटी’ के कारण कठिनाईयों का सामना कर रहे हैं। निर्णय लेने की खंडित प्रकृति, विभागों के काम करने में आपसी दूरी, एक असंबद्ध औद्योगिक नेटवर्क इनके समस्याओं की जड़ है। एक अक्षम लॉजिस्टिक्स नेटवर्क भी हमारी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बाधा डालती है।

गतिशक्ति विभागों के बीच समन्वय की कमी को कैसे दूर करेगा?

अमिताभ कांत कहते हैं, एक कुशल, निर्बाध मल्टी-मॉडल परिवहन नेटवर्क हासिल करना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए एक व्यापक मास्टर प्लान द्वारा निर्देशित, प्रभावकारी समन्वय और सहयोग में काम करने के लिए स्वतंत्र सरकारी विभागों की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने 2021 के अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान इस बात पर जोर दिया था कि राष्ट्रीय मास्टर प्लान, गतिशक्ति हमारे करोड़ों देशवासियों के सपनों को साकार करने में मदद करेगी। गतिशक्ति कार्यक्रम विभागों के बीच की दूरी को तोड़ने के लिए निर्णय लेने में एक आदर्श बदलाव का प्रतीक है। प्रस्तावित योजना में, सभी मौजूदा और प्रस्तावित आर्थिक क्षेत्रों को एक ही प्लेटफॉर्म में मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ मैप किया गया है। विभिन्न मंत्रालयों की अलग-अलग परियोजनाओं की जांच की जाएगी और भविष्य में समग्र योजना के मापदंडों के भीतर मंजूरी दी जाएगी, जिससे प्रयासों में तालमेल बिठाया जा सकेगा। गतिशक्ति भारत में एक विश्वस्तरीय, निर्बाध मल्टी-मॉडल परिवहन नेटवर्क बनाने के लिए तालमेल लाएगी। राष्ट्रीय मास्टर प्लान बुनियादी ढांचे की समन्वित योजना के लिए आधुनिक तकनीक और नवीनतम आईटी उपकरणों को नियोजित करेगा। निगरानी के लिए उपग्रह इमेजरी का उपयोग किया जाएगा। समय पर मंजूरी सुनिश्चित करने और संभावित मुद्दों को चिह्नित करने और परियोजना की निगरानी में डिजिटलीकरण एक बड़ी भूमिका निभाएगा।

यह लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में कैसे सहायक होगा?

मिंट के विश्लेषण के अनुसार, भारत की लॉजिस्टिक्स लागत बहुत अधिक है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 13%है। यह भारत में अधिकांश उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कम प्रतिस्पर्धी बनाता है। सुगम परिवहन से कम लॉजिस्टिक्स  लागत  निर्यात को और अधिक प्रतिस्पर्धी बना देगा। कमजोर परिवहन संपर्क के कारण किसान निर्यात के अवसरों से भी हाथ धो बैठते हैं। निर्बाध अंतिम-मील कनेक्टिविटी बहुत मदद करेगी।

निष्कर्ष-

गति शक्ति देश के विकास परियोजनाओं को गति प्रदान करेगी। जैसे-अगले पांच से छह वर्षों में देश भर में 16,000 किलोमीटर गैस पाइपलाइनों को पूरा करने के लिए मोदी सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने में गति शक्ति सहायक होगी। हालांकि, 2014 तक 27 साल में 15,000 किमी पाइपलाइन का निर्माण किया गया था। पिछले सात वर्षों में 9,000 किमी से अधिक रेलवे लाइनों को दोगुना कर दिया गया है जबकि 2014 से पहले पांच साल में 1,900 किमी पटरियों का दोहरीकरण हुआ।

       विकास आनन्द