भारतीय टीकाकरण अभियान ने बनाए कई रिकॉर्ड : विपुल शर्मा

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भारत दुनिया में सबसे बड़े, सबसे तेज और मुफ्त टीकाकरण अभियान को सफलतापूर्वक लागू कर रहा है और इस जबरदस्त टीकाकरण अभियान को लेकर भारत की कई उपलब्धियां रहीं हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर देश में एक ही दिन में 2.5 करोड़ टीके लागकर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है, जो दुनिया के किसी भी देश द्वारा दिया गया सबसे अधिक टीकाकरण का आंकड़ा है। जमीनी स्तर पर मजबूती के साथ काम कर रही हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के माध्यम से अब तक 80 करोड़ से अधिक वैक्सीन की खुराक दी जा चुकी हैं। 20 करोड़ से अधिक भारतीयों को करोना वैक्सीन की दोनों खुराक दी जा चुकी है, और यह पहली बार नहीं है जब भारत ने एक दिन में एक करोड़ से अधिक खुराकें दी हैं, इससे पहले भारत ने तीन मौकों पर एक करोड़ खुराकों के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल किया है। माना जा रहा है कि मौजूदा रफ्तार से चलते हुए भारत अगले महीने तक 100 करोड़ टीकाकरण के लक्ष्य को हासिल कर लेगा।

महामारी के दौरान भारत ने एक जिम्मेदार देश के रूप में अपने कर्तव्य का निर्वहन किया और न केवल दुनिया भर के 150 देशों को चिकित्सा उपकरण और आवश्यक दवाएं दीं, बल्कि हमने 95 देशों को ‘मेड इन इंडिया’ टीके भी उपलब्ध कराए हैं। इसके अलावा भारत ने अगस्त, 2021 में 180 मिलियन टीके लगाए हैं, यह संख्या सभी जी7 राष्ट्रों की टीकाकरण संख्या से अधिक है, जिसमें यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, इटली, जर्मनी, फ्रांस और जापान जैसे विकसित देश शामिल हैं। गोवा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे भारतीय राज्य ने अपनी 100 प्रतिशत व्यस्क आबादी को वैक्सीन की पहली खुराक देने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इस टीकाकरण अभियान की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि भारत इस अभियान को दो स्वदेशी रूप से विकसित और उत्पादित टीकों के साथ चला रहा है। ये टीके न केवल सुरक्षित हैं बल्कि दुनिया में अपनी प्रभावशीलता साबित भी कर चुके हैं।

भारत ने इन सभी उपलब्धियों को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के असाधारण नेतृत्व में हासिल किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व की काबिलियत विश्व पटल पर विभिन्न अवसरों पर सिद्ध हुई है और वर्ष 2020 में जब कोरोना वायरस का प्रकोप हुआ, तब हम भारत द्वारा उठाए गए कई अभूतपूर्व कदमों के साक्षी बनें। ऐसा माना जाता है कि कोविड-19 जैसी महामारी सौ वर्षों में एक बार मानवता को प्रभावित करती है और ऐसी परिस्थिति से निपटने के लिए हमें लीक से हटकर सोच और कुछ असाधारण उपायों की आवश्यकता होती है जो प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रत्येक निर्णय में प्रदर्शित होती हैं। दुनिया के सबसे बड़े, सबसे तेज और मुफ्त टीकाकरण कार्यक्रम का शुभारंभ उन्हीं फैसलों में से एक था। मोदी सरकार ने भारत की आबादी को कोविड-19 महामारी से बचाने के लिए कुछ बड़े कदम उठाए हैं और इनमें से एक निर्णय स्वदेश में विकसित कोविड-19 टीकों के साथ एक नि:शुक्ल टीकाकरण अभियान की शुरुआत करना था।

‘मेड इन इंडिया’ वैक्सीन

भारत की जनसंख्या दुनिया की आबादी का 17.7 प्रतिशत है, और इनती बड़ी आबादी के लिए वैक्सीन का उत्पादन देश के लिए एक चुनौती था, लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने भारत की वैक्सीन यात्रा में सराहनीय काम किया है। भारत का टीकाकरण कार्यक्रम दो टीकों के लिए आपातकालीन उपयोग के साथ शुरू हुआ, जिसमें एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की ‘कोविशील्ड’, और भारत बायोटेक द्वारा विकसित स्वदेशी ‘कोवैक्सिन’ शामिल है। इनके अलावा, रूस की स्पुतनिक वी वैक्सीन को भी सरकार ने मंजूरी दे दी है। देश की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कोविशील्ड की मासिक उत्पादन क्षमता दिसंबर, 2021 तक 120 मिलियन से अधिक और कोवैक्सिन की लगभग 58 मिलियन खुराक तक बढ़ने का अनुमान है।

विपक्ष ने टीकाकरण अभियान को पटरी से उतारने का प्रयास किया

भारत की वैक्सीन आपूर्ति नीति कई चरणों से गुजरी है। पहले तीन चरणों में स्वास्थ्यकर्मियों, अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों और 60 वर्ष से अधिक या 45 वर्ष तक की आयु के लोगों का टीकाकरण किया गया। तीनों चरणों में केंद्र सरकार द्वारा राज्यों और निजी केंद्रों को टीकों की आपूर्ति की थी। 1 मई से भारत ने 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों के लिए टीकाकरण खोल दिया गया और राज्यों को इसके लिए स्थानीय स्तर पर बनाए गए टीकों के 25 प्रतिशत तक की खरीद करने की अनुमति दी गई; निजी अस्पतालों को भी 25 प्रतिशत खरीदने की अनुमति दी गई; और शेष 50 प्रतिशत स्वास्थ्य और फ्रंटलाइन कर्मचारियों एवं 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए रखे गए, जो केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों को प्रदान किये गये। लेकिन राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और पंजाब जैसे विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों ने केंद्र सरकार से स्वयं वैक्सीन की खरीद करने की अनुमति मांगी, जब सरकार ने राज्यों को अनुमति दी तो यह राज्य अपने राज्यों की अपेक्षित मांगों को पूरा करने में विफल रहे और डेढ़ महीने के बाद जब आपूर्ति और मांग अनुपात बेमेल होने लगा, तो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 21 जून से शुरू होने वाले 18-44 आयु वर्ग के नि:शुल्क टीकाकारण की कमान अपने हाथ में लेकर, इस अभियान का शुभारंभ किया।

तीन राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों ने अपनी 100 प्रतिशत आबादी को वैक्सीन की पहली खुराक दी

महामारी की तीसरी लहर की आशंका के बीच केंद्र और राज्य सरकारों ने इस बीमारी के खिलाफ टीकाकरण अभियान को तेज करने का प्रयास किया है, जिसके परिणामस्वरूप तीन राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों ने अपनी पूरी वयस्क आबादी का शत-प्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य को हासिल कर लिया, इन राज्यों ने अपनी व्यस्क आबादी को वैक्सीन की पहली खुराक देने का काम किया।
हिमाचल प्रदेश सभी वयस्कों का टीकाकरण करने वाला पहला राज्य बना। इसके अतिरिक्त गोवा और सिक्किम ने भी इस लक्ष्य को हासिल किया, जबकि केंद्रशासित प्रदेश जैसे दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, लद्दाख और लक्षद्वीप ने भी इस उपलब्धि को हासिल किया।

भारत ने अगस्त में सभी जी7 देशों की तुलना में अधिक टीके दिये

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 5 सितंबर को कहा की भारत ने अपने टीकाकारण अभियान में एक और उपलब्धि को हासिल किया है, जिसके तहत भारत ने अगस्त महीने में सभी जी 7 देशों की तुलना में अधिक कोविड-19 वैक्सीन खुराक दी है। मंत्रालय ने बताया कि अगस्त के महीने में 180 मिलियन से अधिक वैक्सीन खुराक दी गयी थी। यह संख्या अगस्त, 2021 के संयुक्त राज्य अमेरिका के कुल टीकाकरण से अधिक है जो 23 मिलियन था, फ्रांस का 13 मिलियन, जर्मनी का 9 मिलियन, इटली का 8 मिलियन और यूनाइटेड किंगडम का 5 मिलियन था। ट्वीट किए गए आंकड़ों के अनुसार कनाडा ने क्रमशः सबसे कम 3 मिलियन खुराकें और जापान ने अधिकतम 40 मिलियन खुराक दी है।

इन आंकड़ों के अनुसार भारत सरकार ने अब तक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 66.89 करोड़ (66,89,80,635) से अधिक नि:शुल्क वैक्सीन खुराक प्रदान की हैं। इसके अलावा 1.56 करोड़ से अधिक खुराक और दी जा रही हैं। राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तौर पर भारत सरकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को मुफ्त में कोविड टीके उपलब्ध कराकर उनका समर्थन कर रही है।

कोविड-19 महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई अब तक बहुत सफल रही है और इस लड़ाई में टीकाकरण अभियान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत न केवल अपने नागरिकों के लिए वैक्सीन का उत्पादन कर रहा है, बल्कि मानवीय आधार पर अन्य देशों की भी मदद कर रहा है। जैसे-जैसे नए भारतीय टीके विकसित होंगे, भारत को उम्मीद है कि मौजूदा टीकों की उत्पादन क्षमता में और वृद्धि होगी और जैसे-जैसे हमारा उत्पादन बढ़ेगा, भारत फिर से वैक्सीन निर्यात करने का फैसला लेगा। पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने वाले प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का यही विजन है।

भारत ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर 2.5 करोड़ टीकाकरण कर विश्व रिकॉर्ड बनाया

भारत ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस यानी 17 सितंबर को पहली बार एक दिन में 2.5 करोड़ से अधिक कोविड टीकाकरण कर विश्व रिकार्ड बनाया। इससे पहले, प्रधानमंत्री ने ट्विटर के माध्यम से कहा, ‘हर भारतीय को आज के रिकॉर्ड टीकाकरण संख्या पर गर्व होगा’ और टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को धन्यवाद।

सरकार के कोविन ऐप के अनुसार इस दौरान प्रति सेकंड लगभग 434 टीकाकरण, एक मिनट में लगभग 48,000 और प्रति घंटे 15.62 लाख खुराकें दी गयी। राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में इस बढ़ी छलांग को हासिल करने में प्रधानमंत्रीजी के 71वें जन्मदिन पर आयोजित भाजपा के तीन सप्ताह के उत्सव की अहम भूमिका रही। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि इस दिन अधिक से अधिक लोगों को कोविड टीके लगें भाजपा ने स्वास्थ्य स्वयंसेवकों की एक टीम को भी तैयार किया था।

इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा, ”नया विश्व रिकार्ड! विश्व के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर आज देश में 2.25 करोड़ से अधिक कोविड वैक्सीन डोज़ देने का नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है। मोदीजी के नेतृत्व में हमारे स्वास्थ्यकर्मियों ने अपनी मेहनत से दुनिया को भारत का सामर्थ्य दिखा दिया।”

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री मनसुख मंडाविया ने ट्वीट कर जानकारी दी कि भारत ने 2.5 करोड़ टीकाकरण का आंकड़ा हासिल कर लिया है और कहा, ”भारत को बधाई! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी के जन्मदिवस पर भारत ने आज इतिहास रच दिया है। 2.50 करोड़ से अधिक टीके लगा कर देश और विश्व के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय लिखा है। आज का दिन स्वास्थ्य कर्मियों के नाम रहा।”