अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन : विश्व को भारत का उपहार : राम प्रसाद त्रिपाठी

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सी साल नवंबर 2021 में कॉप-26 ग्लासगो जलवायु शिखर सम्मेलन के दौरान एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में 101वें सदस्य देश के तौर पर शामिल हो गया, जलवायु मुद्दों पर अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत श्री जॉन केरी ने आईएसए फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य सौर ऊर्जा के माध्यम से वैश्विक ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना है।

इसी ग्लासगो शिखर सम्मेलन के दौरान अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) ने भी वैश्विक प्रयासों के अनुरूप महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय जलवायु कार्रवाई के कार्यान्वयन में देशों को सहयोग और समर्थन करने के लिए सहमति के एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। दोनों वैश्विक संस्थान अब संयुक्त रूप से ऊर्जा क्षेत्र में अल्पीकरण की कार्रवाई के कार्यान्वयन को सामूहिक रूप अंजाम देने का प्रयास करने साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान और दीर्घकालिक कम उत्सर्जन विकास रणनीतियों के कार्यान्वयन पर भी काम करेंगे। यह समझौता महत्वपूर्ण है क्योंकि यह छोटे राष्ट्रों और कम विकसित देशों सहित विकासशील देशों को डीकार्बोनाइजेशन प्रौद्योगिकियों के लिए नीति विकल्पों और दृष्टिकोणों को अपनाने में तेजी लाने में सहायता प्रदान करेगा।

यह गठबंधन सौर ऊर्जा को एक साझा समाधान के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है जो एक साथ भौगोलिक स्तर पर जलवायु, ऊर्जा और आर्थिक प्राथमिकताओं को संबोधित करता है

इसी तरह कॉप-26 ग्लासगो शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार करते हुए, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन को संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति से पर्यवेक्षक का दर्जा मिला। यह केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि एक ठोस शुरुआत है। भारत के संकल्प को अपनाने से निश्चित रूप से हरित ऊर्जा कूटनीति के एक नए युग की शुरुआत होगी।

ये हालिया घटनाक्रम न केवल आईएसए को एक वैश्विक संस्था के रूप में स्थापित करेंगे, जो सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित कर, सौर ऊर्जा अपनाते हुए उत्सर्जन में कमी लाने के ध्यये पर काम करता है, साथ ही जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के खिलाफ वैश्विक प्रतिबद्धता को भी मजबूत करेंगे । निस्संदेह, आईएसए के साथ ये सहयोग और हाल ही में इज़राइल, ग्रीस, संयुक्त राज्य अमेरिका और 100 से अधिक सदस्य देशों की उपस्थिति निश्चित रूप से स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु चुनौतियों के लिए दीर्घकालिक, लागत प्रभावी और प्रभावशाली समाधान सामने लाने में मदद करेगा।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए), जिसे नवंबर 2015 में पेरिस, फ्रांस में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी-21) के 21वें सत्र में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति श्री फ्रेंकोइस ओलांद द्वारा शुरू किया गया था, वह सौर ऊर्जा के लिए वित्तपोषण और प्रौद्योगिकी की लागत को कम करने में मदद करके सौर ऊर्जा विकास को उत्प्रेरित करने के लिए वैश्विक जनादेश के साथ एक अंतर-सरकारी संधि-आधारित अंतरराष्ट्रीय संगठन है। यह गठबंधन सौर ऊर्जा को एक साझा समाधान के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है जो एक साथ भौगोलिक स्तर पर जलवायु, ऊर्जा और आर्थिक प्राथमिकताओं को संबोधित करता है, राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा, और स्थानीय स्तर पर ऊर्जा पहुंच सुनिश्चित करता है। आईएसए बड़े देशों की वैश्विक प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में मदद करता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी होती है, साथ ही आर्थिक रूप से अधिक कमजोर देशों को एक आत्मनिर्भर ऊर्जा विकल्प स्थापित करने में मदद मिलती है जो व्यापार निर्भरता को कम करता है और रोजगार सृजन को बढ़ावा देता है।

ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए विभिन्न मंचों पर विभिन्न देश अपनी प्रतिबद्धता दिखा रहे है, इसको लेकर एक जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में भारत दुनिया की अपेक्षा से अधिक काम कर रहा है और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। इसी दिशा में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) भी है, जैसा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में यह भारत का “दुनिया को सच्चा उपहार” है।

भारत, जो लाखों लोगों के लिए जीवन की सुगमता में सुधार के लिए अथक प्रयास कर रहा है, और दुनिया की आबादी का 17 प्रतिशत होने के बावजूद 5 प्रतिशत वैश्विक उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है, उसने यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है कि वह अपने दायित्वों को दृढ़ता से पूरा करे। आज पूरी दुनिया यह मानती है कि भारत ही एकमात्र बड़ी अर्थव्यवस्था है जिसने पेरिस की प्रतिबद्धता को अक्षरशः पूरा किया है।

निस्संदेह भारत अक्षय ऊर्जा को आक्रामक रूप से बढ़ावा देकर, पृथ्वी को बचाने के लिए ‘और अधिक’ प्रयास कर रहा है। पांच साल पहले, भारत में केवल 3 गीगावॉट सौर ऊर्जा पैदा हो रही थी; प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2022 तक 175 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता के निर्माण का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसमें 100 गीगावाट ऊर्जा सौर शामिल है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वह हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

हर साल दुनिया की आबादी से ज्यादा यात्री भारतीय रेलवे से यात्रा करते हैं। इस विशाल रेलवे प्रणाली ने 2030 तक खुद को ‘नेट जीरो’ बनाने का लक्ष्य रखा है। अकेले इस पहल से उत्सर्जन में सालाना 60 मिलियन टन की कमी आएगी। इसी तरह, बड़े पैमाने पर एलईडी बल्ब अभियान उत्सर्जन में सालाना 40 मिलियन टन की कमी कर रहा है। आज भारत दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ ऐसी कई पहलों पर तेज गति से काम कर रहा है।

सौर ऊर्जा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी पहल के तौर पर भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की शुरुआत की क्योंकि कई विकासशील देशों के लिए जलवायु परिवर्तन उनके अस्तित्व पर भारी पड़ रहा था। यह लाखों लोगों की जान बचाने के लिए भारत की एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण पहल है। यह समय की मांग है और आईएसए इसकी प्रासंगिकता साबित कर रहा है। जैसा कि अपेक्षित था, आईएसए भारत को जलवायु के विषय पर बड़े साहस और बड़ी महत्वाकांक्षा के साथ आगे बढ़ने में मदद कर रहा है। यह निश्चित रूप से पृथ्वी के लिए स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और हमारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाने में अहम भूमिका अदा कर सकता है।