नयी मोदी कैबिनेट 2.0: सामाजिक रूप से सबसे विविध और समावेशी

Published on:

राम प्रसाद त्रिपाठी

ई, 2019 में अपने दूसरे कार्यकाल का पदभार संभालने के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पहला कैबिनेट विस्तार किया है, जिसे ‘नए भारत’ के सपने को साकार करने वाला और देश के संसदीय इतिहास में सामाजिक रूप से सबसे विविध और समावेशी विस्तार माना जा रहा है। इस बदलाव के साथ ही प्रधानमंत्री ने कैबिनेट में जहां एक ओर युवा शक्ति को स्थान दिया है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न सामाजिक वर्गों एवं क्षेत्रों के लोगों को शासन में प्रतिनिधित्व दिया है, जो पूरे भारत की विविधता का प्रतिनिधित्व करते हैं।

मंत्रिपरिषद में 43 नए चेहरों को शामिल किया गया है, जिनमें से 15 ने कैबिनेट मंत्री के रूप में और 28 ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली, केंद्रीय मंत्रिमंडल की कुल संख्या बढ़कर 78 हो गई, जिसमें प्रधानमंत्री भी शामिल हैं।

इस कैबिनेट का प्रतिनिधित्व समाज के लगभग सभी वर्गों द्वारा किया जा रहा है। इसलिए, यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यह नया मंत्रिमंडल भारत की विविधता का एक सच्चा प्रतिबिंब है जो भारत के गरीबों, सामाजिक रूप से वंचित और पिछड़ों, विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों, महिलाओं और युवाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है।

नयी मोदी कैबिनेट 2.0 में भारत के विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों की जीवंतता और रंग शामिल हैं और इस कैबिनेट का प्रतिनिधित्व समाज के लगभग सभी वर्गों द्वारा किया जा रहा है। इसलिए, यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यह नया मंत्रिमंडल भारत की विविधता का एक सच्चा प्रतिबिंब है जो भारत के गरीबों, सामाजिक रूप से वंचित और पिछड़ों, विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों, महिलाओं और युवाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है।

विस्तार के बाद मोदी मंत्रिमंडल 2.0 कई मामलों में ‘नवीन पहल’ करने वाला साबित हुआ है। कैबिनेट में युवा शक्ति को सक्रिय प्रतिनिधित्व दिया गया है। निवर्तमान मंत्रिमंडल में मंत्रियों की औसत आयु 61 वर्ष थी, जबकि नए मंत्रिमंडल में औसत आयु 58 वर्ष है, जिसमें से छह कैबिनेट मंत्रियों सहित 14 मंत्रियों की आयु 50 वर्ष से कम है।

इसी तरह विभिन्न क्षेत्रों की उत्कृष्ट प्रतिभाओं और विशेषज्ञों को भी स्थान दिया गया है जिसमें 13 वकील, छह डॉक्टर, पांच इंजीनियर, सात पूर्व सिविल सेवक, सात पीएचडी और तीन एमबीए शामिल हैं, इसमें 68 से अधिक मंत्री स्नातक हैं।

किसी देश को सशक्त बनाने के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण बेहद जरूरी है। इस तथ्य को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पिछले सात वर्षों में यह सुनिश्चित किया है कि महिलाओं को पर्याप्त सम्मान एवं भरपूर अवसर मिले। महिलाओं के कल्याण के लिए किए गए जबरदस्त कार्यों को देखते हुए यह दौर निस्संदेह भारत के हाल के इतिहास में ‘नारी सशक्तिकरण’ के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय के रूप में याद किया जाएगा। इसी प्रयास को जारी रखते हुए और नए भारत की विकास गाथा को आकार देते हुए स्वतंत्र भारत में शायद यह पहली बार हुआ है कि जब प्रधानमंत्री ने दो कैबिनेट मंत्रियों सहित 7 महिला मंत्रियों को शामिल किया, अब महिला मंत्रियों की कुल संख्या 11 हो गई है। यह बदलाव दर्शाता है कि यह दौर महिलाओं विकास की अवधारणा से आगे बढ़कर ‘महिला नेतृत्व वाले विकास’ की ओर चल पड़ा है।

सामाजिक न्याय के संदर्भ में केंद्रीय मंत्रिमंडल में हाल के बदलावों के दूरगामी प्रभाव पड़ने वाले हैं। स्वतंत्र भारत में पहली बार मोदी सरकार 2.0 में आठ राज्यों- बिहार, एमपी, यूपी, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, राजस्थान और तमिलनाडु से दो कैबिनेट मंत्रियों सहित रिकॉर्ड 12 अनुसूचित जाति के मंत्री बने हैं, जो चमार, रामदसिया, खटीक, पासी, कोरी, मडिगा, महार, अरुंधथियार, मेघवाल, राजबंशी, मटुआ-नमाशूद्र, धंगा और दुसाध सहित 12 अनुसूचित जाति समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

कैबिनेट में नए चेहरों को शामिल करने से निस्संदेह सरकार में नई ऊर्जा, गतिशीलता और दृढ़ संकल्प का संचार हुआ है। यह कहने की जरूरत नहीं है कि नई सरकार भारत के विश्व शक्ति के रूप में उभरने के रास्ते में आने वाली किसी भी चुनौती का मुकाबला करने के लिए आत्मविश्वास से भरी है।

इसी तरह मोदी कैबिनेट में रिकॉर्ड आठ एसटी मंत्री हैं और वे आठ राज्यों-अरुणाचल प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और असम का प्रतिनिधित्व करते हैं। 3 कैबिनेट मंत्रियों सहित ये आठ एसटी मंत्री सात एसटी समुदायों-गोंड, संताल, मिजी, मुंडा, चाय जनजाति, कोकाना और सोनोवाल-कछारी से आते हैं।

इसी तरह पहली बार 15 राज्यों और 20 समुदायों- यादव, कुर्मी, जाट, गुर्जर, खांडयात, भंडारी, बैरागी, चाय जनजाति, ठाकोर, कोली, वोक्कालिगा तुलु गौड़ा के पांच कैबिनेट मंत्रियों सहित रिकॉर्ड 28 ओबीसी मंत्रियों को शामिल किया गया है। एझावा, लोध, एग्री, वंजारी, मैतेई, नट, मल्लाह-निषाद, मोध तेली और दारज़ी जैसे कई समुदायों को पहली बार कैबिनेट में शामिल किया गया है।

पांच राज्यों-उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब और अरुणाचल प्रदेश के पांच अल्पसंख्यक मंत्रियों के साथ अल्पसंख्यकों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला है। सरकार में तीन कैबिनेट मंत्रियों समेत एक मुस्लिम, एक सिख, एक ईसाई, दो बौद्ध मोदी सरकार का हिस्सा है, जिसका मूल मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ है।

इसके अलावा 29 मंत्री ब्राह्मण, क्षत्रिय, बनिया, भूमिहार, कायस्थ, लिंगायत, खत्री, कदवा एवं लेउवा पटेल, मराठा, रेड्डी और नायर आदि समुदायों से हैं।

मोदी सरकार में वरिष्ठ और अनुभवी प्रशासकों और विधायकों को स्थान दिया गया है, जिसमें 46 मंत्रियों को केंद्र सरकार में मंत्री होने का पूर्व अनुभव है और 23 मंत्रियों को तीन या अधिक कार्यकाल यानी एक दशक का संसदीय अनुभव है ।

इसी तरह संघवाद की भावना का सम्मान करते हुए मोदी सरकार ने पहली बार लगभग सभी राज्यों से सांसदों को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया है। वर्तमान सरकार में 25 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मंत्री हैं। राज्य विधायी अनुभव के साथ पांच पूर्व सीएम, 23 पूर्व मंत्री (राज्य सरकार) और 38 पूर्व विधायक निश्चित रूप से अपने लंबे अनुभव के साथ केंद्र सरकार को समृद्ध करेंगे।

कैबिनेट में नए चेहरों को शामिल करने से निस्संदेह सरकार में नई ऊर्जा, गतिशीलता और दृढ़ संकल्प का संचार हुआ है। यह कहने की जरूरत नहीं है कि नई सरकार भारत के विश्व शक्ति के रूप में उभरने के रास्ते में आने वाली किसी भी चुनौती का मुकाबला करने के लिए आत्मविश्वास से भरी है।

‘नए भारत’ के इस नए मंत्रिमंडल में देश के सभी राज्यों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व मिला है जो पूरे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि सामाजिक न्याय और लैंगिक न्याय अब प्रतीकात्मक या औपचारिक बातें नहीं है बल्कि महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले पदों पर एक अधिक मजबूत और परिणाम-उन्मुख प्रतिनिधित्व है, जो महत्वपूर्ण बदलाव लाने में हमें सक्षम बनाता है। इसलिए, एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के साथ ही यह देश के राजनीतिक इतिहास में सबसे अधिक सामाजिक रूप से विविध और समावेशी मंत्रियों की परिषद् होगी।

हमारे समाज के कमजोर वर्गों को निर्णय लेने वाले और राष्ट्र के मामलों में हितधारक बनाकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र के संस्थापकों के सपने को साकार करने और इन वर्गों के समग्र विकास के लिए एक ताज़ा और ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत की है।