जहां संस्कृत है, वहीं संस्कृति है और वही हमारी विचारधारा भी है : जगत प्रकाश नड्डा

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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा जी ने आज शनिवार को अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में केंद्रीय संस्कृति विश्वविद्यालय के तत्वाधान में आयोजित उत्कर्ष महोत्सव का शुभारंभ किया। ज्ञात हो कि संस्कृत के तीनों विश्वविद्यालयों केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (नई दिल्ली), लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (नई दिल्ली) और राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (तिरुपति) की ओर से संयुक्त रूप से ‘उत्कर्ष महोत्सव’ का आयोजन किया गया है। उत्कर्ष महोत्सव का मुख्य उद्देश्य संस्कृत भाषा का प्रचार-प्रसार और संवद्र्धन करना है, जिसकी विषय वस्तु ‘नए शैक्षिक युग में संस्कृत अध्ययन का वैश्विक उन्मुखीकरण’ रखी गई है। कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (नई दिल्ली) के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, नालंदा विश्वविद्यालय (नालंदा) के कुलाधिपति डॉ विजय भाटकर, राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (तिरुपति) के कुलपति प्रो. राधाकांत ठाकुर, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (नई दिल्ली) के कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक, आर्थिक परामर्श परिषद् के अध्यक्ष श्री बिबेक देबरॉय और राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (तिरुपति) के कुलसचिव श्री चलावेंकटेश्वर भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री नड्डा ने सबसे पहले सभी उपस्थित मनीषियों को उत्कर्ष महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा एवं संस्कृति को आगे बढ़ाना हम सबकी जिम्मेदारी है। हमारी ज्ञान, विज्ञान, अर्थ, गणित भाषा – सबकी उत्पत्ति की बीज संस्कृत ही है। संस्कृत महज एक भाषा नहीं बल्कि यह विभिन्न आयामों को आगे बढ़ाने का एक सद्मार्ग है। पुरातन ज्ञान को संजो कर रखने वाली भाषा भी संस्कृत ही है। आप सब ने संस्कृत को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। मैं इस महान कार्य के लिए आप सबको धन्यवाद देता हूँ।

माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि जहां संस्कृत है, वहीं संस्कृति है और वही हमारी विचारधारा भी है। संस्कृति के साथ-साथ यह विकास का भी माध्यम है। संस्कृत देवभाषा और अमृत वाणी है। हम सबको अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने का माध्यम संस्कृत ही है। सबसे पुरानी पुस्तक ऋग्वेद भी संस्कृत में ही है। हम सब अपने इतिहास को अच्छे तरीके से जानते हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी, संस्कृत और संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए कटिबद्ध भाव से काम कर रही है। हम संस्कृति का संरक्षण कर रहे हैं। भारत की पुरातन परंपरा और महान संस्कृति को अक्षुण्ण रखने के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी प्रतिबद्ध है। संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए श्री नरेन्द्र मोदी सरकार कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। यह निश्चित रूप से संस्कृत और संस्कृति के संवर्धन के लिए सबसे अच्छा काल है। ऐसा काल सदैव बना रहे, यह आप सब की, हम सभी देशवासियों की जिम्मेवारी है।

श्री नड्डा ने कहा कि देवभाषा संस्कृत ने संस्कृति से जोड़कर गूढ़ विषयों को बडे़ ही सरलता से रखा है। भारत आज अध्यात्म, योग, संस्कृति और मानवता से जुड़े विषयों में दुनिया में सबसे आगे है। इसका मुख्य अवयव देश की महान संस्कृति है और संस्कृति की उत्पत्ति संस्कृत से है। कोरोना काल में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने जहाँ एक ओर स्वदेशी वैक्सीन से 135 करोड़ देशवासियों को सुरक्षा कवच दिया, वहीं दूसरी ओर, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से देश के 80 करोड़ लोगों के लिए दो साल तक दो वक्त की रोटी का भी प्रबंध किया। इतना ही नहीं, वैक्सीन मैत्री के तहत हमने दुनिया के लगभग 100 देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराया। श्री नरेन्द्र मोदी सरकार ने देश के गरीबों की भी चिंता की और देश के अर्थतंत्र की गति को भी रुकने नहीं दिया। देशवासियों की सुरक्षा के लिए जब माननीय प्रधानमंत्री जी ने लॉकडाउन लगाया तो सभी देशवासियों ने उसका अनुसरण किया। पूरी दुनिया में कोरोना से केवल सरकारों ने लड़ाई लड़ी लेकिन भारत में 135 करोड़ देशवासियों ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि विदेशों में लोग कहते रहते हैं कि – गिव मी स्पेस, गिव मी स्पेस जबकि भारत में लोकल बसों और ट्रेन में देख लीजिये कि कैसे हजारों लोग एक साथ आत्मीय भाव से सफ़र करते हैं, मिलजुल कर चलते हैं। यही हमारी संस्कृति है जो 135 करोड़ देशवासियों को एक साथ जोड़े रखती है। सहनशीलता, सहिष्णुता, सबकी बातें सुनना, सत्य की खोज के लिए विपक्ष की बात भी गहराई से सुनना – यही हमारी संस्कृति की पहचान है। दूसरे पक्ष को रखने वाले लोग अपने ही समाज में मिलते हैं। यह है सोचने की संस्कृति का संचार। यही तो भारतीय संस्कृति की मूल अवधारणा है।

श्री नड्डा ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (नई दिल्ली), लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (नई दिल्ली) और राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (तिरुपति), तीनों संस्कृत विश्वविद्यालयों को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया। यह हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इन विश्वविद्यालयों को क्यों पहले केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा नहीं दिया गया? माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने हर मंच पर संस्कृत की महत्ता को स्थापित किया है। जब नीयत साफ़ हो तो नीति भी स्पष्ट होती है और उन नीतियों को जमीन पर लागू करने वाले आप जैसे मनीषी ही हैं।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सत्ता में आने के बाद देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति – दोनों पर काम हुआ। इसके लिए हजारों-लाखों सुझावों पर अध्ययन-मनन हुआ और मैं आज गौरव के साथ कह सकता हूँ कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्टीय स्वास्थ्य नीति – दोनों ही नीतियां भारत की मिट्टी को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है जो भारत की जमीन और जड़ों से जुड़ी हुई हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भाषा का भी ध्यान रखा गया है और संस्कृत को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किये गए हैं। 

श्री नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार प्रो-एक्टिव, प्रो-पुअर, प्रो-रिस्पोंसिव और रिस्पोंसिबल सरकार है। विद्या एवं शिक्षा, किसी भी जीवित समाज के महत्वपूर्ण आयाम हैं। इस आयाम को संभालते हैं तो देश संभलता है, देश की संस्कृति संवर्धित होती है और मानवता का भला होता है। मैं आप सब को विश्वास दिलाता हूँ कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, उनके नेतृत्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार और भाजपा – हम सब संस्कृत और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कटिबद्ध हैं। मैं पुनः आप सबको उत्कर्ष महोत्सव की शुभकामनाएं देता हूँ।