पीएलआई : ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ी पहल : विकास आनन्द

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संसद में वित्त वर्ष 2021-22 का बजट प्रस्तुत करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने विनिर्माण क्षेत्र में दो अंकों की वृद्धि की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की विनिर्माण कंपनियों को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का एक अभिन्न अंग बनने की जरूरत है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए 13 क्षेत्रों में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना शुरू की गई। वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में पीएलआई (उत्पादन से जुड़ा प्रोत्साहन) के लिए लगभग 1.97 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। इस योजना के तहत सरकार द्वारा बढ़ती बिक्री पर प्रत्यक्ष प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसका मतलब है कि प्रोत्साहन उन घरेलू विनिर्माण इकाइयों को दिया जाएगा जो तय वर्ष (Base Year) से पांच साल की अवधि के लिए अतिरिक्त बिक्री करेंगी। पीएलआई योजना बढ़ते निवेश पर भी प्रदान की जाएगी।
योजना का मुख्य लक्ष्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और निर्यात क्षमता को बढ़ाना तथा विनिर्माण में विदेशी निवेश को आकर्षित करना है। यह पहल निर्यात की मात्रा को बढ़ाकर और आयात को कम करके भुगतान संतुलन में सुधार करने में भी सक्षम होगी। यह पहल सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान से प्रेरित है।

भारतीय कपड़ा उद्योग का कपड़ा और परिधान में वैश्विक निर्यात का 5% हिस्सा है, लेकिन मानव निर्मित फाइबर (एमएमएफ) क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी वैश्विक उपभोग के हिसाब से कम है। पीएलआई योजना घरेलू विनिर्माण को और बढ़ावा देने के लिए इस क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करेगी, विशेष रूप से एमएमएफ और तकनीकी वस्त्रों में। प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग के विकास से किसानों को बेहतर कीमत मिलती है और बर्बादी कम होती है

इससे पहले मार्च, 2020 में पीएलआई की घोषणा तीन क्षेत्रों– ड्रग इंटरमीडिएट्स (दवा बनाने वाली सामग्री), बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और चिकित्सा उपकरणों के निर्माण में की गई थी। अतिरिक्त 10 क्षेत्रों– इलेक्ट्रॉनिक/प्रौद्योगिकी उत्पाद, दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पाद, खाद्य उत्पाद, घरेलू सामान, उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल, ऑटोमोबाइल और ऑटो घटक, एडवांस केमिस्ट्री सेल (एसीसी) बैटरी, कपड़ा उत्पाद और स्पेशलिटी स्टील में घोषणा इस साल के बजट में की गयी थी।
इस योजना को आगे बढ़ाते हुए मोदी सरकार ने 15 सितंबर, 2021 को देश में इलेक्ट्रिक वाहन और हाइड्रोजन ईंधन-सेल वाहन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए ऑटोमोबाइल और ड्रोन क्षेत्र के लिए 26,058 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ एक पीएलआई योजना को मंजूरी दी। ऑटोमोबाइल उद्योग और ड्रोन उद्योग के लिए पीएलआई योजना केंद्रीय बजट 2021-22 में किए गए 13 क्षेत्रों के लिए पीएलआई योजनाओं की समग्र घोषणा का हिस्सा है।

ऑटो सेक्टर के लिए पीएलआई योजना उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी वाहनों और उत्पादों को प्रोत्साहित करेगी और रोजगार पैदा करेगी। यह योजना अतिरिक्त 7.5 लाख रोजगार सृजित करने में सहायक होगी, इससे वैश्विक ऑटोमोटिव व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी। ऑटो और ऑटोकंपोनेंट व्यवसायों के लिए इस योजना से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को लाभ होगा।
पिछले साल की शुरुआत में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऑटो विनिर्माण उद्योग के लिए 57,043 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ पीएलआई योजना को मंजूरी दी थी। पीएलआई योजना को बाद में उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए संशोधित किया गया था। नव-घोषित पीएलआई योजना वित्तीय वर्ष 2023 से पांच वर्षों के लिए प्रभावी होगी और पात्रता मानदंड के लिए आधार वर्ष 2019-20 होगा। मौजूदा ऑटोमोटिव कंपनियां और नए निवेशक दोनों ही इस योजना का लाभ लेने के पात्र होंगे।

इन क्षेत्रों में पीएलआई योजना भारतीय निर्माताओं को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करेगी, निर्यात बढ़ाएगी और भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला का एक अभिन्न अंग बनाएगी।

एसीसी बैटरी निर्माण कई वैश्विक विकास क्षेत्रों, जैसे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए इक्कीसवीं सदी के सबसे बड़े आर्थिक अवसरों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है। एसीसी बैटरी के लिए पीएलआई योजना देश में प्रतिस्पर्धी एसीसी बैटरी सेट-अप स्थापित करने के लिए बड़े घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करेगी। ऑटोमोटिव उद्योग भारत में एक प्रमुख आर्थिक योगदानकर्ता है। पीएलआई योजना भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगी और भारतीय ऑटोमोटिव क्षेत्र के वैश्वीकरण को बढ़ाएगी।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार भारतीय दवा उद्योग मात्रा के हिसाब से दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा और मूल्य के हिसाब से 14वें स्थान पर है। यह विश्व स्तर पर निर्यात की जाने वाली कुल दवाओं का 3.5% योगदान देता है। भारत में फार्मास्यूटिकल्स के विकास और निर्माण के लिए पर्याप्त पारिस्थितिकी तंत्र और उससे संबद्ध उद्योगों का भी एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र है। पीएलआई योजना वैश्विक और घरेलू उद्यमियों को उच्च मूल्य के उत्पादन में संलग्न होने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

दूरसंचार उपकरण का घरेलू उत्पादन एक सुरक्षित दूरसंचार बुनियादी ढांचे के निर्माण का एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक तत्व है तथा भारत दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों का उपकरण निर्माता बनने की आकांक्षा रखता है। पीएलआई योजना से वैश्विक निवेश और तकनीकी को आकर्षित करने और घरेलू कंपनियों को उभरते अवसरों का लाभ उठाने और निर्यात बाजार में बड़े खिलाड़ी बनने में मदद मिलने की उम्मीद है।

भारतीय कपड़ा उद्योग का कपड़ा और परिधान में वैश्विक निर्यात का 5% हिस्सा है, लेकिन मानव निर्मित फाइबर (एमएमएफ) क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी वैश्विक उपभोग के हिसाब से कम है। पीएलआई योजना घरेलू विनिर्माण को और बढ़ावा देने के लिए इस क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करेगी, विशेष रूप से एमएमएफ और तकनीकी वस्त्रों में। प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग के विकास से किसानों को बेहतर कीमत मिलती है और बर्बादी कम होती है।

भारत ने पिछले एक वित्तीय वर्ष में घरेलू निर्माताओं को प्रोत्साहित करके सौर पीवी पैनलों के आयात को घटाकर 571 मिलियन डॉलर कर दिया। सुरक्षात्मक टैरिफ उपायों के अलावा सौर पीवी मॉड्यूल के लिए केंद्रित पीएलआई योजना घरेलू और वैश्विक खिलाड़ियों को भारत में बड़े पैमाने पर सौर पीवी क्षमता बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी और भारत को सौर पीवी निर्माण के लिए वैश्विक मूल्य शृंखलाओं पर कब्जा करने में मदद करेगी।

भारत में घरेलू वस्तुओं (White Goods) जैसे एयर कंडीशनर और एलईडी में अतिरिक्त वैल्यू जोड़ने और इन उत्पादों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की बहुत अधिक क्षमता है। इस क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना से अधिक घरेलू विनिर्माण, रोजगार सृजन और निर्यात में वृद्धि होगी।
दैकिन, पनासोनिक, हिताची, मेततुबे, निदेक, वोल्टास, ब्लूस्टार, हवेल्ल्स, अम्बर, इपैक, उनिग्लोबस, राधिका ऑप्टो, सिसका जैसी कई कंपनियों ने एयर कंडीशनर और लेड के महत्वपूर्ण घटकों के निर्माण के लिए आवेदन किया है।

व्हाइट गुड्स (एयर कंडीशनर और एलईडी लाइट) के घटकों के घरेलू निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए पीएलआई योजना के तहत कुल 52 कंपनियों ने 5,866 करोड़ रुपये के प्रतिबद्ध निवेश के साथ अपना आवेदन दायर किया है, जिसके लिए आवेदन 15 सितंबर, 2021 को बंद हो गए। घरेलू वस्तुओं पर पीएलआई योजना 16 अप्रैल, 2021 को अधिसूचित की गई थी। 21 फर्म एलईडी घटकों के लिए 871 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी। एसी कंपोनेंट निर्माण के लिए 31 फर्मों ने लगभग 4,995 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई है। एसी के लिए भारत का वार्षिक बाजार 7 मिलियन से अधिक है, लेकिन विडंबना यह है कि इसमें से 6 मिलियन सिर्फ 25% वैल्यू एडीसन भारत में उत्पादन किए जाते हैं। पीएलआई योजना में कई गुना उत्पादन क्षमता के साथ वैल्यू एडीसन के अनुपात को 75 प्रतिशत करने की क्षमता है।

भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश है। इस्पात मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार भारत ने 2020-21 के दौरान 10.7 मिलियन टन तैयार स्टील का निर्यात किया। भारत 170 से अधिक देशों को स्टील का निर्यात करता है। इसमें स्टील के कुछ ग्रेड में चैंपियन बनने की क्षमता है। स्पेशलिटी स्टील में पीएलआई गुणवत्ता और बढ़ाकर स्टील विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने में मदद करेगी जिससे कुल निर्यात में वृद्धि होगी।

योजना के शुरू होने के बाद टोयोटा-त्सुशो और सुमिदा जैसी विदेशी कंपनियां भी अपनी विनिर्माण इकाइयों को भारत में स्थानांतरित करने की योजना बना रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स की बड़ी कंपनी सैमसंग ने अपनी विनिर्माण इकाई चीन से स्थान्तरण कर भारत के नोएडा में स्थापित भी कर चुका है। एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 1,000 कंपनियां भारत में अपने मैन्युफैक्चरिंग बेस को शिफ्ट करने के लिए विभिन्न स्तरों पर भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत कर रही हैं। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइसेज, टेक्सटाइल और सिंथेटिक फैब्रिक जैसे क्षेत्रों से संबंधित लगभग 300 कंपनियां उत्पादन योजनाओं को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रही हैं।

पीएलआई योजना विदेशी फर्मों और ऋण देने वाली एजेंसियों को आकर्षित करके भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए उत्प्रेरक प्रभाव पैदा कर सकती है। पीएलआई योजना लंबे समय में एक मजबूत विनिर्माण आधार तैयार करेगी और 2024 तक भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव को और मजबूत करने में सफल होगी।