प्रधानमंत्री ने त्रिपुरा के 1.47 लाख से अधिक लाभार्थियों को पीएमएवाई-जी की पहली किस्त हस्तांतरित की

Published on:

आज देश के विकास को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना से देखा जाता है।
विकास को अब देश की एकता-अखंडता का पर्याय माना जाता है

त 14 नवंबर को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने त्रिपुरा के 1.47 लाख से अधिक लाभार्थियों को पीएमएवाई-जी की पहली किस्त हस्तांतरित की। इस अवसर पर लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे 700 करोड़ रुपये से अधिक जमा किए गए। प्रधानमंत्री की पहल के बाद त्रिपुरा की अनूठी भू-जलवायु स्थिति को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से राज्य के लिए ‘कच्चा’ घर की परिभाषा बदल दी गई है। परिणामस्वरूप, इतनी बड़ी संख्या में ‘कच्चे’ घरों में रहने वाले लाभार्थी ‘पक्का’ घर बनाने के लिए सहायता प्राप्त करने में सक्षम हुए हैं। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने लाभार्थियों से बातचीत भी की।

सभा को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि आज का कार्यक्रम त्रिपुरा के लिए आने वाले अच्छे दिनों तथा उम्मीद का संकेत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य में बिप्लब देब जी की सरकार और केन्द्र की सरकार राज्य की प्रगति को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। श्री मोदी ने कहा कि आज प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दी गई पहली किस्त ने त्रिपुरा के सपनों को भी नया हौसला दिया है। मैं पहली किस्त का लाभ पाने वाले करीब-करीब डेढ़ लाख परिवारों को, सभी त्रिपुरावासियों को हृदय से बधाई देता हूं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब त्रिपुरा को गरीब बनाए रखने वाली, त्रिपुरा के लोगों को सुख-सुविधाओं से दूर रखने वाली सोच की त्रिपुरा में कोई जगह नहीं है। अब यहां डबल इंजन की सरकार पूरी ताकत और ईमानदारी से राज्य के विकास में जुटी है।

क्षेत्र के प्रति लंबे समय से व्याप्त उपेक्षा की चर्चा करते हुए श्री मोदी ने कहा कि पहले देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों से हमारी नदियां तो पूरब की ओर आती थीं, लेकिन विकास की गंगा यहां पहुंचने से पहले ही सिमट जाती थीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के समग्र विकास को टुकड़ों में देखा जाता था, सियासी चश्मे से देखा जाता था। इसलिए, हमारा पूर्वोत्तर खुद को उपेक्षित महसूस करता था। उन्होंने यह भी कहा कि लेकिन आज देश के विकास को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना से देखा जाता है। विकास को अब देश की एकता-अखंडता का पर्याय माना जाता है।

श्री मोदी ने देश के विकास में उनके अमूल्य योगदान के लिए भारत की आत्मविश्वास से भरपूर महिला शक्ति की विशेष रूप से चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस महिला शक्ति का बहुत बड़ा प्रतीक, हमारे महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप भी हैं। इन एसएचजी को जन-धन खातों के साथ जोड़ा गया है। ऐसे समूहों के लिए उपलब्ध बिना गिरवी के ऋण को दोगुना कर बीस लाख रुपये कर दिया गया है।

श्री मोदी ने कहा कि आज़ादी के इतिहास में हमारे पूर्वोत्तर और देश के आदिवासी सेनानियों ने देश के लिए अपना बलिदान दिया है। इस परंपरा को सम्मान देने के लिए, इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए देश लगातार काम कर रहा है। इसी कड़ी में अमृत महोत्सव के दौरान देश ने एक और बड़ा फैसला किया है। देश अब हर साल 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाएगा। 2 अक्टूबर-अहिंसा दिवस, 31 अक्टूबर-एकता दिवस, 26 जनवरी-गणतंत्र दिवस, राम नवमी, कृष्ण अष्टमी आदि के रूप में इस दिन को राष्ट्रीय आइकनोग्राफी में समान महत्व मिलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दिवस न केवल जनजातीय समाज के योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित करने का दिन होगा, बल्कि यह सौहार्दपूर्ण समाज के प्रतीक के रूप में भी उभरेगा।