यह छात्रवृत्ति अनुसूचित जाति के पोस्ट मैट्रिक छात्रों के लिए सुरक्षा कवच है


भारतीय जनता पार्टी, अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री लाल सिंह आर्य से ‘अनुसूचित जाति के पोस्ट मैट्रिक छात्रों के लिए छात्रवृत्ति’ मुद्दे पर कमल संदेश के सह संपादक संजीव सिन्हा ने बातचीत की, जिसके प्रमुख अंश यहां प्रस्तुत हैं :      

देश में 1944 से अनुसूचित जाति के पोस्ट मैट्रिक बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजना चालू थी। आजादी के बाद से अभी तक आवश्यक रुपए की व्यवस्था नहीं थी। इस छात्रवृत्ति में कुछ अनियमितताएं भी थीं। कम राशि होने के कारण छात्रों को यदि कुछ नए इंस्ट्रूमेंट लेना है, कुछ टेक्नाॅलोजी से जुड़ना है तो नहीं जुड़ पाते थे। राज्य सरकार समय पर पैसा नहीं भेजती थी इन छात्रों को, तो उनको जो भी साधन पढ़ने के लिए खरीदने थे तो वो उससे वंचित रहते थे। इस कारण से बच्चे कहीं न कहीं विद्यालय छोड़ते थे। ऐसी संख्या करोड़ों में है।

पहली बार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गहलोत एवं उनकी टीम ने एक अध्ययन किया कि आखिर अनुसूचित जाति के पोस्ट मैट्रिक बच्चे जो विद्यालय छोड़ रहे हैं, वो विद्यालय कैसे आएं, उनको पढ़ाई के साधन कैसे मिले, पारदर्शी व्यवस्था कैसे हो, इस संबंध में कैबिनेट की बैठक में निर्णय हुआ कि आनेवाले पांच वर्षों की योजना बनाई जाए और उन योजनाओं के तहत इस राशि को कई गुना बढ़ाकर 59 हजार करोड़ रुपए पांच साल में केंद्र सरकार खर्च करेगी। छात्रों का रजिस्ट्रेशन होगा, राज्य में उनके बैंक में खाते खुलेंगे और एक क्लिक से उन छात्रों के खाते में केंद्र सरकार पैसे डालेगी, तो एक पारदर्शी व्यवस्था हो गई।
इस छात्रवृत्ति में छात्रों को लैपटाॅप लेना है, रहने की, खाने की ये सारी व्यवस्थाएं कहीं न कहीं हैं। एक बड़ी चीज इसमें और की गई है कि पहले 60 लाख बच्चे ही लाभान्वित हो रहे थे, अब इससे प्रतिवर्ष चार करोड़ बच्चे लाभान्वित होंगे। एक करोड़ 36 लाख ऐसे बच्चे जो विद्यालय छोड़ गए हैं, उनके लिए सरकार घर-घर चलने का अभियान चलाएगी। उन बच्चों के परिवार और उनके बीच में जाना और उनसे आग्रह करना कि चलिए, आप दोबारा नामांकन करा लीजिए। तो सरकार का ऐसा अनुमान है कि कुल 36 लाख बच्चे पांच साल में पुनः विद्यालय में लौटेंगे। यह कहा जा सकता है कि बाबा साहेब अंबेडकर और दीनदयाल उपाध्याय जी के सपनों को अगर ईमानदारी से कोई पूरा कर रहा है तो नरेन्द्र मोदी जी की सरकार कर रही है।

कांग्रेस 57 वर्ष हिंदुस्तान में सत्ता में रही, उसके कई प्रधानमंत्री रहे, राज्यों में अनेक वर्षों तक उसके कई मुख्यमंत्री रहे, जो नरेन्द्र मोदी जी ने सोचा है, वो कांग्रेस ने क्यों नहीं सोचा? अगर कांग्रेस ने ईमानदारी से पोस्ट मैट्रिक छात्रों के लिए सोच लिया होता तो ड्राॅपआउट होता ही नहीं, बच्चे विद्यालय छोड़ते ही नहीं, नए बच्चे और आते। नरेन्द्र मोदी जी का जो ये निर्णय है, वह बहुत ऐतिहासिक है, बहुत पारदर्शी है और अनुसूचित जाति के पाेस्ट मैट्रिक छात्रों के लिए सुरक्षा कवच है।