मोदीजी ने भारत को विश्व शक्ति बनाया

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श्री नरेन्द्र मोदी पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र में सरकार बनानेवाले पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने सात साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया है। श्री नरेन्द्र मोदी की सत्ता में सात साल पूरा करने की उपलब्धि को किस रूप में देखा जाना चाहिए? उनकी सत्ता उपलब्धि की पड़ताल किन-किन प्रसंगों को आधार बनाकर किया जाना चाहिए? क्या श्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्रित्व कार्यकाल में राष्ट्रवाद मजबूत हुआ है, क्या देश की अस्मिता का संरक्षण हुआ है, क्या हमारी सीमाएं शत्रु देशों से सुरक्षित हुई हैं, क्या हमारी सेना आधुनिक युद्ध हथियारों से लैस हुई है? क्या वैश्विक नियामकों को गतिशील बनाने में भारत की उपलब्धियां सर्वश्रेष्ठ रही है? इजराइल-फिलिस्तीन युद्ध विवाद में भारत की भूमिका भारत के राष्ट्रवादी नागरिकों का प्रतिनिधित्व कर रही थी या नहीं? कोरोना महामारी को नियंत्रित करने में श्री नरेन्द्र मोदी ने अग्रणी भूमिका किस प्रकार से निभाई है? क्या गरीब और विकासशील देशों की वैक्सीन मैत्री कर सनातन संस्कृति के मूलमंत्र “वसुधैव कुटुम्बकम” के अनुरूप कार्य किया? क्या कोरोना काल में मजदूर किसान के हित और उनकी जरूरतों को पूरा करने में श्री नरेन्द्र मोदी की भूमिका बेमिसाल मानी जानी चाहिए?
सबसे पहले मोदी विरोधी विपक्ष की अफवाहों, आरोपों और हिंसक सक्रियता की पड़ताल होनी चाहिए। जहां तक मोदी विरोधियों की अफवाहों और शोर की बात है, तो विपक्ष बार-बार पराजित हो रहा है। भारत में श्री नरेन्द्र मोदी पहले ऐसे राजनेता हैं, पहले ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं, पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने सर्वाधिक जहरीला और अफवाहपूर्ण विरोध को झेला है, अंतरराष्ट्रीय विरोध और प्रतिबन्ध को झेला है। श्री नरेन्द्र मोदी का विरोध करते-करते कई विरोधी देश के विरोधी हो गए। कोई पाकिस्तान की बोली बोलने लगा, तो कोई श्री नरेन्द्र मोदी को पराजित करने के लिए पाकिस्तान-चीन से मदद मांगने लगा। सर्वविदित है कि कांग्रेस के नेता मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान जाकर श्री नरेन्द्र मोदी को हराने के लिए पाकिस्तान से मदद मांगी थी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री राहुल गांधी और श्रीमती सोनिया गांधी कश्मीर के प्रश्न पर पाकिस्तान की भाषा बोलते रहे हैं। वैश्विक वैक्सीन की उपलब्धि पर विपक्षी दलों ने क्या-क्या नहीं कहा? इतना तक कह डाला कि श्री नरेन्द्र मोदी की वैक्सीन जो लगाएगा, वह नपुंसक हो जाएगा। इतने सारे विरोध के बावजूद मोदीजी विचलित नहीं हुए। चुपचाप रहना, अपने काम पर ध्यान देना, अपने काम और अपनी उपलब्धियों से ही विरोधियों को जवाब देना उनके काम का तरीका है। अपने काम और अपनी उपलब्धियों से ही वे विपक्ष का शिकार करते हैं।
राष्ट्रवाद के प्रसंग में श्री नरेन्द्र मोदी की उपलब्धि महान है। हमें खंडित देश मिला था। मजहब के आधार पर देश का विभाजन हुआ। पाकिस्तान एक नया मजहबी देश बना। अंग्रेजों की साजिश का हम शिकार हुए। अंग्रेजों की साजिश में कश्मीर का प्रश्न राष्ट्र के लिए खतरनाक बन गया, राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन गया। पंडित जवाहरलाल नेहरू की गलती और अति पाकिस्तान प्रेम के कारण कश्मीर का प्रश्न अंतरराष्ट्रीय बन गया। कई दशकों तक कश्मीर में विखंडनकारी शक्तियां हमारी राष्ट्रीय एकता और अखंडता को रौंदती रहीं। कश्मीर में भीषण आतंकवाद का दौर चला, पाकिस्तान ने कश्मीर को लूटने के लिए कोई एक नहीं बल्कि तीन-तीन युद्ध लड़ा। कश्मीर में विखंडनवादी शक्तियों से लड़ते-लड़ते डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी बलिदान हुए थे। जनसंघ ने कश्मीर में धारा 370 हटाने और राष्ट्रवाद की नींव मजबूत करने का सपना देखा था।
आप याद कीजिए फारूक अब्दुल्ला को, आप याद कीजिए उमर अब्दुल्ला को, आप याद कीजिए महबूबा मुफ्ती को, जिन्होंने कहा था कि धारा 370 हटाने की श्री नरेन्द्र मोदी की औकात नहीं है। कश्मीर से धारा 370 हटी, तो फिर कश्मीर के अंदर में हिंसक विरोध होगा। तिरंगे झंडे को उठानेवाला कोई नहीं मिलेगा। इतना ही नहीं बल्कि पाकिस्तान ने अपनी आतंकवादी शक्ति का भय दिखाया था। कुछ मुस्लिम देशों की ओर से भी धमकियां आई थी, देश के गद्दारों ने भी धमकियां दी थीं कि अगर कश्मीर की स्थिति में कोई परिवर्तन हुआ तो फिर भारत की एकता और अखंडता भी खंडित हो जाएगी, इसके अलावा कश्मीर के लोग विद्रोह कर देंगे।
श्री नरेन्द्र मोदी पक्के राष्ट्रभक्त हैं। एक राष्ट्रभक्त के लिए राष्ट्र ही सर्वोपरि होता है। राष्ट्र की सुरक्षा एवं राष्ट्र की अस्मिता ही महत्वपूर्ण होता है। श्री नरेन्द्र मोदी ने धारा 370 समाप्त कर दिया। दुनिया को यह बता दिया कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। भारत अपनी संवैधानिक और सुरक्षा जरूरतों के लिए कश्मीर में कोई भी कदम उठाने के लिए स्वतंत्र है। कश्मीर में आतंकवादी हिंसा और राष्ट्र विरोधी शक्तियों की हिंसा को जमींदोज कर दिया गया। हमारी सेना ने कश्मीर में धारा 370 हटाने के खिलाफ हिंसक आतंकवादियों और पाकिस्तानपरस्त लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की, जिसके कारण कश्मीर के अंदर राष्ट्रवाद निरंतर मजबूत होता चला गया और आतंकवादी शक्तियां, भारत विरोधी मजहबी शक्तियां, पाकिस्तानपरस्त लोग निरंतर कमजोर होते चले गए। हाशिए पर खड़े होते चले गए। कश्मीरी पंडित जो अपने घरों से खदेड़ दिए गए थे, वे देश के कोने कोने में आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे थे, उनके बीच में आशा की किरण जगी है। कश्मीरी पंडितों की घर वापसी की योजना तैयार है। कश्मीरी पंडितों की घर वापसी सुनिश्चित है। कश्मीर में धारा 370 को हटाने की कूटनीति में भी श्री नरेन्द्र मोदी को महान जीत मिली।
कोई भी राष्ट्र देशद्रोहियों को संरक्षण देकर महान नहीं बन सकता है। अपनी संप्रभुता का संरक्षण नहीं कर सकता है। अपने नागरिकों की सुरक्षा नहीं कर सकता है। इसलिए देशद्रोहियों का दमन जरूरी है। मोदी सरकार ने सीएए कानून लागू किया। सीएए कानून के खिलाफ राष्ट्रद्रोहियों ने किस प्रकार से साजिश रची थी और प्रायोजित विरोध प्रदर्शन करवाएं, यह भी जगजाहिर है। श्री नरेन्द्र मोदी ने दृढ़ता दिखाई, सीएए कानूनों को वापस लेने से दृढ़ता से इंकार कर दिया। सीएए कानून से उन विदेशी ताकतों को एक सबक मिला है, जो भारत को सराय मान बैठे हैं। अभी-अभी मोदी सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश सहित अन्य मजहबी हिंसक देशों से आए हिंदुओं को नागरिकता आवेदन देने के लिए आमंत्रित किया है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदुओं की पीड़ा और अपमान अब समाप्त होगा।
मोदी सरकार में किसानों को हरसंभव मदद की कोशिश हुई है। किसानों के बैंक खाते में हर साल 6000 रुपए जमा हो रहे हैं। पश्चिम बंगाल में ममताजी ने जहां इस योजना को लागू करने से इंकार कर दिया था, वहां भी अब किसानों को यह सुविधा मिल गई है। ममता बनर्जी अब इस योजना को लागू करने के लिए बाध्य हुई है। खाद बोरी पर सब्सिडी को पांच सौ से बढ़ाकर बारह सौ रुपए कर दिए गए हैं। कृषि कानून देश हित और किसान हित में है। सभी श्रेणी के किसानों को इससे लाभ मिलेगा, पर विपक्ष ने कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों को भड़काने का काम किया। विदेशी शक्तियां भी किसानों को भड़काने में लगी रहीं। किसानों के कथित आंदोलन में घुसपैठ कर बाहरी लोगों ने हिंसा फैलाने की कोई कसर नहीं छोड़ी। लाल किले पर भी कब्जा करने की कोशिश की गई। फिर भी श्री नरेन्द्र मोदी ने संयम से काम लिया। किसानों के आंदोलन पर श्री नरेन्द्र मोदी ने कोई सख्ती नहीं दिखाई। याद कीजिए आप बाबा रामदेव के आंदोलन को, कांग्रेस की तत्कालीन सरकार ने बर्बरतापूर्ण लाठी चलवाई और रामलीला मैदान से बाबा रामदेव को खदेड़ दिया गया था।
भारत का विपक्ष श्री नरेन्द्र मोदी पर वैक्सीन को लेकर आरोप लगाता रहा था कि पूरी दुनिया कोरोना वैक्सीन खोजने में व्यस्त है, पर मोदीजी चुपचाप बैठे हुए हैं। मोदीजी की तैयारी और कर्मठता से दुनिया तब चमत्कृत हुई, जब श्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणा की थी कि हमने एक नहीं बल्कि दो-दो वैक्सीन बनाई है। भारत की वैक्सीन उपलब्धि पर जहां पूरी दुनिया श्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा कर रही थी, वही भारत का विपक्ष विदेशी हाथों में खेल रहा था। भारतीय वैक्सीन के खिलाफ अभियान चलाया गया। यहां तक कहा गया कि मोदीजी ने मुसलमानों को प्रताड़ित करने, मारने और नपुंसक बनाने के लिए वैक्सीन बनवाई है। भारत ने पड़ोसी देशों और विकसित देशों को भी वैक्सीन दिया है। कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी जरूर हुई पर मोदीजी ने जल्द ही ऑक्सीजन की कमी को दूर कर दिया और कोरोना की दूसरी लहर को भी थाम लिया।
कोरोना काल में किसान मजदूरों और अन्य गरीबों को श्री नरेन्द्र मोदी ने नगद राशि, राशन, रसोई गैस उपलब्ध कराई है। देश के करोड़ों गरीबों को मुफ्त राशन मिल रहा है।
मोदीजी जहां देश के विकास में लगे हुए हैं, वहीं विपक्ष की राज्य सरकारें सिर्फ समस्या खड़ी कर रही हैं। अपनी नाकामी को मोदीजी के सिर पर मढ़ने का काम कर रही हैं। इससे खुद उन राज्यों का विकास बाधित होता है। निश्चित तौर पर श्री नरेन्द्र मोदी भारत को दुनिया की एक महान शक्ति के रूप में स्थापित करने के अहर्निश प्रयास में लगे हुए हैं।

(लेखक भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हैं।)