कॉप-26

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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के साथ द्विपक्षीय बैठक

यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 1 नवंबर को ग्लासगो, ब्रिटेन में कॉप-26 वर्ल्ड लीडर्स शिखर सम्मेलन के अवसर पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन एमपी से भेंट की।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने विशेष रूप से व्यापार और अर्थव्यवस्था, लोगों के बीच आपसी संपर्क, स्वास्थ्य, रक्षा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में रोडमैप 2030 प्राथमिकताओं के कार्यान्वयन की समीक्षा की।

दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान, आतंकवाद, भारत-प्रशांत, आपूर्ति शृंखला में लचीलापन और कोविड के पश्चात वैश्विक आर्थिक सुधार सहित क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा की।

वर्ष 2070 तक भारत का नेट जीरो का लक्ष्य

ग्लासगो, ब्रिटेन में कॉप-26 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक नवंबर को कहा कि आज मैं आपके बीच उस भूमि का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं, जिस भूमि ने हजारों वर्ष पहले ये मंत्र दिया था-
सम्-गच्छ-ध्वम्,
सम्-व-दद्वम् ,
सम् वो मानसि जानताम्।

आज 21वीं सदी में ये मंत्र और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है, प्रासंगिक हो गया है।
सम्-गच्छ-ध्वम् यानी सभी साथ मिलकर चलें सम्-व-दद्वम् यानी सभी मिल-जुलकर आपस में संवाद करें और सम् वो मनानसि जानताम् यानी सभी के मन भी आपस में मिले रहें।

उन्होंने कहा कि जब मैं पहली बार क्लाइमेट समिट में पेरिस आया था, तब मेरा यह इरादा नहीं था कि दुनिया में हो रहे अनेक वायदों में एक वायदा अपना भी जोड़ दूं।

उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व मानता है कि भारत एकमात्र बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसने पेरिस कमिटमेंट पर लेटर एंड स्पिरिट में डिलिवर किया है। हम संकल्पबद्ध होकर हर संभव प्रयास कर रहे हैं, परिश्रम कर रहे हैं और परिणाम लाकर दिखा रहे हैं।

श्री मोदी ने कहा कि आज जब मैं आपके बीच आया हूं तो भारत के ट्रैक रिकॉर्ड को भी लेकर आया हूं। मेरी बातें सिर्फ शब्द नहीं हैं, ये भावी पीढ़ी के उज्जवल भविष्य का जयघोष हैं।

उन्होंने कहा कि क्लाइमेट चेंज पर इस वैश्विक मंथन के बीच मैं भारत की ओर से इस चुनौती से निपटने के लिए पांच अमृत तत्व रखना चाहता हूं, पंचामृत की सौगात देना चाहता हूं।

पहला- भारत, 2030 तक अपनी Non-Fossil Energy Capacity को 500 गीगावाट तक पहुंचाएगा।
दूसरा- भारत, 2030 तक अपनी 50 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतों को renewable energy से पूरी करेगा।
तीसरा- भारत, अब से लेकर 2030 तक के कुल प्रोजेक्टेड कार्बन एमिशन में एक बिलियन टन की कमी करेगा।

चौथा- 2030 तक भारत, अपनी अर्थव्यवस्था की कार्बन इंटेन्सिटी को 45 प्रतिशत से भी कम करेगा।
और पांचवा- वर्ष 2070 तक भारत, नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करेगा।
ये पंचामृत, क्लाइमेट एक्शन में भारत का एक अभूतपूर्व योगदान होंगे।