भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बना

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मोदी सरकार के समर्पित प्रयासों ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम वाले शीर्ष तीन देशों में ला दिया है।                                                                   

विकास आनंद

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने जनवरी, 2016 में उद्यमिता को बढ़ावा देने, एक मजबूत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने तथा भारत को ‘जॉब सीकर’ की जगह पर ‘जॉब क्रिएटर’ वाला देश बनाने के उद्देश्य से ‘स्टार्टअप इंडिया इनिशिएटिव’ शुरू किया। इसके लिए सरकार ने अनेक सुधार किए। इससे पूर्व की प्रणाली जटिल और अव्यवस्थित थी, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमियों को स्टार्टअप शुरू करने के लिए हतोत्साहित होना पड़ता था।

सरकार ने उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए कंप्लायंस का आसानी से कार्यान्वयन, असफल स्टार्टअप के लिए आसान निकास प्रक्रिया, पेटेंट आवेदनों की तेजी से ट्रैकिंग, सूचना विषमता को कम करने के लिए एक समर्पित वेबसाइट, पात्र स्टार्टअप के लिए आयकर और पूंजीगत लाभ कर पर छूट व निवेश का व्यवस्था शुरू किया। साथ ही, मोदी सरकार के प्रयासों से व्यापार सुगमता में भारत की रैंकिंग लगातार सुधर रही है। मोदी सरकार के समर्पित प्रयासों ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम वाले शीर्ष तीन देशों में ला दिया है। अगस्त के अंत में हुरुन रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित ‘यूनिकॉर्न लिस्ट-2021’ के अनुसार अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है।

‘यूनिकॉर्न’ शब्द का प्रयोग वित्तीय दुनिया में एक निजी स्वामित्व वाली स्टार्टअप कंपनी को परिभाषित करने के लिए किया जाता है, जिसका मूल्य $1 बिलियन से अधिक होता है। पिछले एक साल में भारत ने हर महीने तीन यूनिकॉर्न बढ़ाया हैं, जिससे यूनिकॉर्न की कुल संख्या 51 हो गई है, जो ब्रिटेन (32) और जर्मनी (18) से आगे है। कुल 396 यूनिकॉर्न के साथ अमेरिका शीर्ष पर बना हुआ है और चीन 277 यूनिकॉर्न के साथ दूसरे स्थान पर है। वर्तमान में भारत में यूनिकॉर्न की कुल कीमत 168 बिलियन डॉलर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अकेले 2021 में 25 यूनिकॉर्न जोड़े हैं। यूनिकॉर्न के अलावा हुरुन रिसर्च इंस्टीट्यूट ने भारत में भविष्य के यूनिकॉर्न की सूची तैयार की है। यह भविष्य के यूनिकॉर्न को दो समूहों में वर्गीकृत करता है- ‘गज़ेल्स’ और ‘चीता’। गज़ेल्स वे स्टार्टअप हैं जिनमें दो साल के भीतर यूनिकॉर्न बनने की क्षमता है और चीता वे हैं जिनमें चार साल के भीतर यूनिकॉर्न बनने की क्षमता है।

भविष्य के यूनिकॉर्न की सूची 2021 से पता चलता है कि 500 बिलियन डॉलर से अधिक मूल्य की ‘गज़ेल्स’ श्रेणी के तहत 32 स्टार्टअप दो वर्षों में यूनिकॉर्न में परिवर्तित हो सकते हैं, जबकि 54 ‘चीता’ श्रेणी के अंतर्गत आते हैं, जिनका मूल्यांकन 200 मिलियन डॉलर से अधिक है, वे यूनिकॉर्न का दर्जा चार साल के भीतर प्राप्त कर सकते हैं। ऑनलाइन रिटेल स्टोर ‘ज़िलिंगो’ सबसे मूल्यवान गज़ेल है और ऑनलाइन फ़र्नीचर प्लेटफ़ॉर्म ‘पेपरफ्राई’ सबसे मूल्यवान चीता है।

बेंगलुरु स्थित गेमिंग कंपनी ‘मोबाइल प्रीमियर लीग’ हुरुन फ्यूचर यूनिकॉर्न लिस्ट में दूसरे स्थान पर है। मोबाइल प्रीमियर लीग को सिकोइया कैपिटल, मूर स्ट्रेटेजिक वेंचर्स, एसआईजी, पेगासस टेक वेंचर्स, फाउंडर्स सर्कल और अन्य निवेशकों से कुल 230 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश मिला। ‘रिबेल फूड्स’ भारत का पहला क्लाउड किचन स्टार्ट-अप, हुरुन इंडिया फ्यूचर यूनिकॉर्न लिस्ट 2021 में तीसरे स्थान पर है। ‘क्योरफिट’ एक फिटनेस स्टार्ट-अप है, हुरुन इंडिया फ्यूचर यूनिकॉर्न लिस्ट 2021 में चौथे स्थान पर है। जून, 2021 में टाटा डिजिटल, टेमासेक, एक्सेल पार्टनर्स, एपिक कैपिटल, यूनिलीवर स्विस जैसे निवेशकों द्वारा क्योरफिट में निवेश के लिए समझौता हुआ है। गुरुग्राम स्थित ई-कॉमर्स कंपनी ‘स्पिनी’ को हुरुन इंडिया फ्यूचर यूनिकॉर्न लिस्ट 2021 में चौथा स्थान मिला है। 900 कर्मचारियों के साथ स्पिनी वर्तमान में 9 शहरों में काम करता है और 120 मिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक निवेश जुटाया है।

अन्य भविष्य के यूनिकॉर्न जो शीर्ष दस में हैं, वे हैं ट्रैवल टेक्नोलॉजी कंपनी ‘रेट गेन’, ई-कॉमर्स मामाअर्थ (गुरुग्राम), गुरुग्राम स्थित ‘कारदेखो’, रोबोटिक्स स्टार्ट-अप ‘ग्रेऑरेंज’, फिनटेक कंपनी मोबिक्विक भी गुरुग्राम में स्थित हैं।

शीर्ष दस सेक्टर जो यूनिकॉर्न फ्यूचर लिस्ट में जगह बनाई है वे हैं- फिनटेक (18 कंपनियां), ई-कॉमर्स (17 कंपनियां), सास (7 कंपनियां), शेयर्ड इकॉनमी (6 कंपनियां), गेमिंग (4 कंपनियां), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (4), लॉजिस्टिक्स (4), हेल्थटेक (4), मीडिया एंड एंटरटेनमेंट (3), एडुटेक (3), कंज्यूमर गुड्स (3)।

शोध में एक अनूठी विशेषता सामने आई है कि भविष्य की यूनिकॉर्न सूची में स्टार्टअप के संस्थापकों ने आईआईटी या आईआईएम से स्नातक और स्नातकोत्तर किया है। रिपोर्ट इस ओर इशारा करती है कि भारत ब्रेन ड्रेन की समस्या को रोकने में सक्षम होता जा रहा है जिससे वह लंबे समय से जूझ रहा था। शोध में यह भी कहा गया है कि 11 सह-संस्थापक 30 वर्ष से कम आयु के हैं और 15 सह-संस्थापक 50 वर्ष से अधिक आयु के हैं।

हुरुन के रिसर्च की एक अन्य खास विशेषता महिलाओं में उद्यमशीलता कौशल का उभरना है। इसके साथ ही, यह बात भी गौर करने वाली है कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने महिलाओं को बहुत बधाई दी थी। उस दिन प्रधानमंत्री श्री मोदी ने महिला उद्यमियों से कुछ खास खरीदारी भी की। इस अनोखे तरीके से उनका इरादा महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने था। मोदी सरकार ने उद्यमिता में नए भारत की नारी शक्ति को बढ़ावा देने के लिए कई सुधार किए हैं और उसमें आने वाली बाधाओं को दूर किया है। हुरुन शोध संस्थान द्वारा जारी किए गए आंकड़े महिलाओं की उभरती उद्यमशीलता को उजागर करते हैं। फ्यूचर यूनिकॉर्न लिस्ट 2021 में 12 स्टार्ट-अप महिला उद्यमियों द्वारा सह-स्थापित किए गए हैं। महिला उद्यमियों ने हुरुन इंडिया फ्यूचर यूनिकॉर्न लिस्ट 2021 में पांच गज़ेल्स और सात चीता की सह-स्थापक हैं। इसी तरह, छह महिला उद्यमियों ने भारत में यूनिकॉर्न स्टार्ट-अप की सह-स्थापक रही हैं।

यह ध्यान देने योग्य बात है कि सूची में संस्थापकों की औसत आयु 39 वर्ष है। इसका अर्थ है कि सरकार की स्टार्टअप इंडिया पहल युवा प्रतिभाओं को आकर्षित कर रही है। रिपोर्ट ने बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और मुंबई को 3 प्रमुख स्टार्टअप हब में रखा है। 31 स्टार्टअप के साथ बेंगलुरु भारत का पहला प्रमुख स्टार्टअप हब है, जिसके बाद दिल्ली-एनसीआर में 18 स्टार्टअप और फिर मुंबई में 13 स्टार्टअप हैं।

ये स्टार्टअप घरेलू और विदेशी निवेश दोनों को आकर्षित कर रहे हैं। देश में निवेश के अनुकूल माहौल बनाने की मोदी सरकार की पहल से निवेशकों का भारत में विश्वास बढ़ा है। गज़ेल्स और चीता में शीर्ष निवेशक सिकोइया (37 निवेश के साथ) है, इसके बाद टाइगर ग्लोबल (18 निवेश के साथ) है।