सहकारिता आंदोलन भारत के ग्रामीण समाज की प्रगति करेगा :अमित शाह

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य को केंद्र में रखकर अस्तित्व में आये सहकारिता मंत्रालय के पहले सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 25 सितंबर, 2021 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित अपनी तरह के पहले और अनूठे सहकारी समागम में सहकारिता से जुड़े लोगों को संबोधित किया। कार्यक्रम में सहकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा और इंटरनेशनल कोआपरेटिव एलांयस (ग्लोबल) के अध्यक्ष डॉ. एरियल ग्वार्को भी उपस्थित थे। इस सम्मेलन में सभा स्थल पर देशभर के अलग-अलग राज्यों एवं विभिन्न सहकारी क्षेत्रों के लगभग 2,100 से अधिक सहकारी बंधु उपस्थित रहे जबकि दुनिया भर से करोड़ों सहकारी जन कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़े। इस कार्यक्रम से लगभग 6 करोड़ लोग वर्चुअली जुड़े। ट्विटर पर #SahkarSeSamriddhi लगातार ट्रेंड करता रहा।

ज्ञात हो कि हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय का गठन किया गया था। आम बजट-2021 में सरकार ने सहकारिता मंत्रालय के गठन की घोषणा की थी। देश में सहकारिता आंदोलन को मज़बूत करने एवं सहकारी समितियों के लिए ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ के लिए प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने हेतु गठित सहकारिता मंत्रालय का मूल मंत्र है ‘सहकार से समृद्धि’। यह कार्यक्रम भारत की अग्रणी सहकारी संस्था इफको, भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ, अमूल, सहकार भारती, नैफेड, कृभको एवं समस्त सहकारी परिवार के तत्वाधान में रहा है। श्री शाह ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। कार्यक्रम में इफ्को के चेयरमैन बलविंदर सिंह नकई ने स्वागत भाषण दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री अमित शाह ने कहा कि सहकारिता आंदोलन भारत के ग्रामीण समाज का विकास करेगा और एक नई सामाजिक पूंजी की अवधारणा भी खड़ी करेगा। पंडित दीनदयाल उपाध्यायजी को विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयालजी हमारे जैसे पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा के अदम्य स्रोत हैं।

श्री शाह ने कहा कि देश के विकास में सहकारिता बहुत महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। वर्तमान में भी सहकारी संस्थाएं देश के विकास में अभूतपूर्व योगदान दे रही हैं। बहुत प्रयास हुए हैं, लेकिन इस दिशा में और बहुत कुछ करना बाकी है। में नए सिरे से सोचना पड़ेगा, नए सिरे से रेखांकित करना पड़ेगा, काम का दायरा बढ़ाना पड़ेगा और पारदर्शिता लानी पड़ेगी। हर गांव को को-ऑपरेटिव के साथ जोड़कर, सहकार से समृद्धि के मंत्र साथ हर गांव को समृद्ध बनाना और उसके बाद देश को समृद्ध बनाना, यही सहकार की भूमिका होती है।

श्री शाह ने कहा कि आज देश में लगभग 91% गांव ऐसे हैं जहां छोटी-बड़ी कोई न कोई सहकारी संस्था काम करती है। दुनिया में कोई ऐसा देश नहीं होगा जिसके 91% गांव में सहकारिता उपस्थित हो। देश के लगभग 36 लाख परिवार किसी न किसी रूप में सहकारिता से सीधे जुड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि अमूल ने वह करके दिखाया जो बड़े-बड़े कॉर्पोरेट नहीं कर सके। अमूल का उदय लौह पुरुष सरदार पटेल की दूरदर्शिता के कारण संभव हुआ। 1946 में जब अंग्रेजों ने यह फैसला किया कि किसानों को अपना सारा दूध एक प्राइवेट कंपनी को देना होगा, तब इसके खिलाफ एक आंदोलन की शुरुआत हुई। सरदार पटेल ने किसानों के प्रतिनिधि त्रिभुवन दास पटेल को एक सहकारी संस्था बनाने का सुझाव देते हुए कहा कि जब तक हम दूध बेचने की अपनी व्यवस्था नहीं करते हैं, तब तक यह आंदोलन सफल नहीं होगा। इस तरह सरदार पटेल के मार्गदर्शन में त्रिभुवन दास पटेल ने दो प्राथमिक दूध उत्पादक समिति का पंजीकरण किया, जिससे शुरुआत में केवल 80 किसान जुड़े थे। आज अमूल हम सब के सामने है। 2020-21 में अमूल का टर्नओवर 53 हजार करोड़ रुपये को पार कर गया है। 1946 में 247 लीटर दूध से शुरू हुआ को-ऑपरेशन आज रोजाना लगभग 3 करोड़ लीटर तक पहुंच चुका है। इससे लगभग 36 लाख किसान जुड़े हैं। इसने विशेष तौर पर महिलाओं का सशक्तिकरण का काम किया है। आज 87 से ज्यादा डेयरी मैन्युफैक्चरिंग के प्लांट्स हैं जिसकी प्रबंधन क्षमता 39 मिलियन टन दूध के प्रोसेस करने की है।

श्री शाह ने कहा कि अमूल से जहां देश के करोड़ों किसान जुड़े हुए हैं तो लिज्जत पापड़ से महिलाओं को रोजगार मिला है। बहन जसवंती जमनादास पोपट ने कुछ बहनों को साथ लेकर 80 रुपये के कर्ज से एक कोऑपरेटिव संस्था बनाकर पापड़ बनाने के काम की शुरुआत की थी। 2019 में उनका कारोबार 1600 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो चुका है। आज लिज्जत पापड़ लगभग 80 करोड़ पापड़ निर्यात करती है और लगभग 4500 महिलायें लिज्जत की कोऑपरेटिव आंदोलन से जुड़ी हुई हैं। उनकी ये सक्सेस स्टोरी देश की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

उन्होंने कहा कि 1967 में 57 कोऑपरेटिव के साथ एक सोसाइटी बनाई गई इफ्को आज 36,000 से भी ज्यादा कोआपरेटिव को साथ लेकर चल रही है। लगभग 5.5 करोड़ किसान को इसका लाभ मिल रहा है। आप कल्पना कर सकते हैं– एक बड़ी कंपनी कुछ भी कमाती है तो वह इसके मालिक को जाती है लेकिन इफ्को जो भी आय अर्जित करती है, उसकी पाई-पाई लगभग 5.5 करोड़ किसान को जायेगी, इसी को तो कोऑपरेटिव कहते हैं। आज इफ्को देश के लिए लगभग-लगभग उर्वरकों की पूरी जिम्मेदारी उठाती है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि हम उर्वरक के मामले में आत्मनिर्भर बनेंगे और हमें उर्वरकों का आयात नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने क्रिपको के बारे में भी बताया कि किस तरह 9 हज़ार 500 समितियों का बना हुआ ये संगठन एक साल में लगभग 2,000 करोड़ रुपये से अधिक लाभांश दे रही है। उन्होंने नैफेड, रेणु हस्तकरघा हस्तशिल्प, उरालुंगल श्रम अनुबंध सहकारी समिति केरल, द्रावणगिरि (कर्नाटक) के सहकारी संगठन और कोझिकोड कोऑपरेटिव हॉस्पिटल जैसी संस्थाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये सभी संगठन सहकारिता आंदोलन के माध्यम से छोटी-छोटी पूंजी इकठ्ठा करके देश के विकास और अर्थव्यवस्था की मजबूती में अहम योगदान दे रही हैं। इसका सारा मुनाफ़ा छोटे-छोटे निवेशकों के घर में जाता है।

श्री शाह ने कहा कि आज देश में 8 लाख 55 हज़ार से ज्यादा रजिस्टर्ड समितियां हैं। 8.5 लाख से ज्यादा क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी हैं। लोन न देनेवाली सहकारी समितियों की संख्या 60 लाख से अधिक है। राष्ट्रीय सहकारिता समिति 17 से अधिक हैं। राज्य स्तरीय सहकारी बैंकों की संख्या 33 हैं और जिला स्तरीय सहकारी बैंकों की संख्या 363 हैं। लगभग 95 हजार में से 63 हजार पैक्स काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आज देश में कृषि ऋण का 29% वितरण सहकारिता बैंकों के माध्यम से किया जाता है, 35% उर्वरक वितरण इनके माध्यम से हो रहा है, 30% सहकारी संस्थाएं उर्वरक का उत्पादन कर रही हैं, देश की कुल चीनी की लागत का 31% उत्पादन इन समितियों के माध्यम से हो रहा है। दुग्ध की खरीदी और उत्पादन 20%, गेहूं की खरीदी 13%, धन की खरीदी 20% और मछुआरा के क्षेत्र में भी 21% कार्य सहकारी समितियां करती हैं। अब समय आ गया है कि हमें इसके लिए नए लक्ष्य तय करने हैं और इस पर एक मजबूत इमारत खड़ी करनी है। ये हम सबका कर्तव्य है।

उन्होंने कहा कि मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव को सुगम बनाने के लिए हम बहुत जल्द एक्ट में हम बदलाव करेंगे। आने वाले पांच सालों में हमारा लक्ष्य होगा कि देश के हर दूसरे गांव में पैक्स हो जाए। पैक्स की संख्या को 65 हजार से बढ़ाकर 3 लाख तक पहुंचाने का काम सहकारिता मंत्रालय करेगा।

श्री शाह ने कहा कि हमने तय किया है कि हम कुछ ही समय में 2022 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नई सहकारी नीति लेकर आयेंगे जो पहले श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयीजी लेकर आये थे। आजादी के अमृत महोत्सव में नई सहकारी नीति को बनाने की हम शुरुआत करेंगे। हमें स्पर्धा में टिकने वाली सफल को-ऑपरेटिव बनाना है।